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चंडीगढ़- विधायी संवाद को नई दिशा देगा राष्ट्रमंडल संसदीय संघ का 11वां भारतीय क्षेत्रीय सम्मेलन : हरविन्द्र कल्याण

विधायी संवाद को नई दिशा देगा राष्ट्रमंडल संसदीय संघ का 11वां भारतीय क्षेत्रीय सम्मेलन : हरविन्द्र कल्याण

चंडीगढ़, प्रमोद कौशिक 10 सितंबर : बेंगलुरु में 11 से 13 सितंबर तक होने जा रहा राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) के 11वें भारतीय क्षेत्रीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण बेंगलुरु पहुंच गए हैं। उनके साथ विधान सभा उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण लाल मिड्ढा, सचिव राजीव प्रसाद और अन्य अधिकारीगण भी सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। लोकतंत्र के मूल स्वरूप को मजबूत करने की दिशा में आयोजित इस सम्मेलन का विषय ‘विधायी संस्थाओं में संवाद और चर्चा : जन विश्वास का आधार, जन आकांक्षाओं की पूर्ति का माध्यम’ तय किया गया है।
राष्ट्रमंडल भारतीय क्षेत्र का गठन 2004 में हुआ था। इससे पहले भारत राष्ट्रमंडल संसदीय संघ एशिया का हिस्सा था। भारतीय संसद के अतिरिक्त देश के 31 विधान मंडल इसके सदस्य हैं।
विस अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि आज जब लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं रह गया है और ऐसे में विधायिकाओं की भूमिका महज कानून बनाने तक सीमित न रहकर जन अपेक्षाओं की पूर्ति और नीतिगत संवाद की ओर अग्रसर हो रही है। यह सम्मेलन न सिर्फ विभिन्न विधान मंडलों के बीच संवाद का मंच प्रदान करेगा, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर भी व्यापक चिंतन और मंथन का अवसर देगा।
उन्होंने कहा कि विधायिकाओं में संवाद और चर्चा की परंपरा को मजबूती देना, न केवल पारदर्शिता को बढ़ाता है, बल्कि यह जनविश्वास की पुनर्स्थापना में भी सहायक होता है। इस सम्मेलन के माध्यम से राज्यों के विधान मंडल एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकेंगे और संसदीय कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बना सकेंगे।
गौरतलब है कि यह सम्मेलन ऐसे समय पर हो रहा है जब देश में विधायी प्रक्रियाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता पर व्यापक विमर्श जारी है। प्रतिनिधियों के बीच खुली चर्चा और विचारों का आदान-प्रदान निश्चित ही नीति निर्माण की दिशा में सार्थक पहल होगी। साथ ही, यह आयोजन संघीय ढांचे के तहत केंद्र और राज्यों की विधायिकाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का भी माध्यम बनेगा।
हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण विधायी नवाचार और संवाद को लेकर गंभीर हैं। वे चाहते हैं कि समय के साथ भारतीय लोकतंत्र में विधायिकाओं की भूमिका अधिक उत्तरदायी व पारदर्शी होनी चाहिए। वे इस दिशा में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘एक राष्ट्र-एक विधान मंडल’ की सोच के अंतर्गत सम्मेलन और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित कर रहे हैं।

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