
कोचिंग सेंटरों पर नकेल: लखनऊ हादसे के बाद अयोध्या में DIOS की बड़ी कार्रवाई, मानकविहीन संस्थानों में हड़कंप
अयोध्या, 23 जून 2026 (ब्यूरो – पंकज पाठक):
लखनऊ में हाल ही में हुए भीषण कोचिंग हादसे के बाद उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर अब पूरे प्रदेश में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। इसी क्रम में आज जनपद अयोध्या में बिना पंजीकरण और मानकविहीन चल रहे कोचिंग संस्थानों के खिलाफ एक बड़ा चेकिंग अभियान चलाया गया। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) डॉ. पवन कुमार तिवारी ने खुद फील्ड में उतरकर विभिन्न कोचिंग सेंटरों की सघन जांच की, जिससे नियम ताक पर रखकर दुकान चला रहे संचालकों में हड़कंप मच गया।
सुरक्षा मानकों को लेकर सख्त दिखे DIOS
जांच के दौरान जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. पवन कुमार तिवारी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बेहद सख्त नजर आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों की जान के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चेकिंग के दौरान उन्होंने हर संस्थान में अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) के पुख्ता इंतजामों को परखा।
कोचिंग संचालकों को दिए गए कड़े निर्देश:
DIOS ने सभी कोचिंग संचालकों को कड़ी चेतावनी देते हुए निम्नलिखित व्यवस्थाएं तत्काल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं:
पंजीकरण अनिवार्य: जनपद में कोई भी कोचिंग संस्थान बिना वैध पंजीकरण के संचालित नहीं होना चाहिए।
फायर सेफ्टी: प्रत्येक संस्थान में पर्याप्त संख्या में चालू हालत में अग्निशमन (फायर) सिलेंडर की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
आवागमन की व्यवस्था: आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए छात्र-छात्राओं के आने और जाने के रास्ते (Entry & Exit Points) बिल्कुल अलग-अलग और चौड़े होने चाहिए।
”लखनऊ की घटना से सबक लेते हुए अयोध्या जनपद के सभी कोचिंग संस्थानों की सघन चेकिंग की जा रही है। जो भी कोचिंग संस्थान बिना रजिस्ट्रेशन या सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए पाए जाएंगे, उन्हें तत्काल सील कर उनके संचालकों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
– डॉ. पवन कुमार तिवारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, अयोध्या
अवैध रूप से चल रहे सेंटरों पर गिरेगी गाज
प्रशासन के इस कड़े रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में अयोध्या में बिना मान्यता और तंग गलियों या बेसमेंट में चल रहे कोचिंग सेंटरों पर बड़ी गाज गिर सकती है। विभाग का कहना है कि यह चेकिंग अभियान लगातार जारी रहेगा ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके और छात्र-छात्राएं सुरक्षित माहौल में शिक्षा ग्रहण कर सकें।

