
100 से अधिक बच्चों ने उत्साहपूर्वक लिया भाग, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास का मिला संदेश।
थानेसर,प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी 1 जून : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के विश्व शांति धाम, कुरुक्षेत्र में तीन दिवसीय समर कैंप का शुभारंभ बड़े उत्साह एवं उल्लास के साथ हुआ। समर कैंप में पहुंचे सभी बच्चों का वेलकम टैग लगाकर आत्मीय स्वागत किया गया। 100 से अधिक बच्चों ने उत्साहपूर्वक अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
कार्यक्रम का शुभारंभ राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज बहन, ईशानी चाइल्ड केयर स्कूल की प्रधानाचार्या पूजा नारंग एवं मनीष नारंग द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया।
इस अवसर पर प्रधानाचार्या पूजा नारंग ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि इतने पवित्र एवं संस्कारमय वातावरण में आयोजित इस समर कैंप का हिस्सा बनना सौभाग्य की बात है। उन्होंने बच्चों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यहां उन्हें अपने व्यक्तित्व को निखारने और जीवन मूल्यों को सीखने का श्रेष्ठ अवसर प्राप्त होगा।
राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज बहन ने कहा कि आज के ये छोटे-छोटे बच्चे ही देश का स्वर्णिम भविष्य हैं। इनमें से कोई वैज्ञानिक, शिक्षक, व्यवसायी या समाज का श्रेष्ठ नेतृत्वकर्ता बनेगा। बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभाओं और विशेषताओं को उजागर करने के लिए यह समर कैंप एक सुनहरा अवसर है। उन्होंने सभी बच्चों एवं अभिभावकों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ “प्रेम से बस दो घड़ी प्रभु का ध्यान कीजिए” प्रार्थना गीत से हुआ। इसके पश्चात ब्रह्माकुमारी मधु बहन ने बच्चों को आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच एवं आत्म-प्रेरणा का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि जब हम कोई नया कार्य आरंभ करते हैं तो प्रारंभ में भय महसूस होता है, लेकिन आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति के बल पर हर चुनौती को पार किया जा सकता है। स्वयं को आगे बढ़ाने के लिए स्वयं को प्रोत्साहित करना भी आवश्यक है।
प्रोजेक्टर के माध्यम से बच्चों को प्रेरणादायक वीडियो दिखाई गईं तथा विभिन्न रोचक गतिविधियों द्वारा शरीर और आत्मा के संबंध तथा मन के सकारात्मक परिवर्तन की प्रक्रिया को सरल ढंग से समझाया गया। मधु बहन ने राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराते हुए बताया कि यदि दिन की शुरुआत सकारात्मक संकल्प और परमात्मा को अपना साथी बनाकर की जाए तो पूरा दिन हल्केपन, खुशी और ऊर्जा से भर जाता है।
कार्यक्रम के अंत में “स्वर्णिम भारत के हम बच्चे” गीत की मधुर धुन पर सभी बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। तत्पश्चात बच्चों को ईश्वरीय प्रसाद स्वरूप उनकी पसंद का केक एवं शीतल पेय वितरित किया गया तथा अगले दिन समय पर पहुंचने का निमंत्रण दिया गया।


