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दिव्या ज्योति जागृती संस्थान की ओर से केंद्रीय कारागार में बंदी भाइयों के लिए संस्थान द्वारा संचालित नशा उन्मूलन कार्यक्रम दिशा के अंतर्गत “एक युद्ध अपने विरुद्ध” वर्कशॉप का किया गया आयोजन

(पंजाब) फिरोजपुर 29 अगस्त [कैलाश शर्मा जिला विशेष संवाददाता]=

“दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान” की ओर से स्थानीय केंद्रीय आदर्श कारागार शिमला में बन्दी भाइयों के सर्वांगीण विकास के लिए संस्थान द्वारा संचालित नशा उन्मूलन कार्यक्रम बोध के अन्तर्गत एक युद्ध अपने विरुद्ध वर्कशॉप का आयोजन किया गया। जिसमें “श्री आशुतोष महाराज जी” के शिष्य स्वामी विज्ञानानंद जी ने कैदी बंधुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भौतिकतावाद की अंधी दौड़ में युवा वर्ग के पास भौतिक सुख सुविधाएँ तो हैं परंतु मानसिक शांति न होने के कारण वह चिंता एवं अवसाद से मुक्ति के लिए नशे की दलदल में फंस कर अपनी चारित्रिक शक्ति और नैतिक मूल्यों का ह्रास कर रहा है।
“नशे” की परिभाषा देते हुए स्वामी जी ने बताया की “न शम् शांतिर्मया इति नशा” अर्थात् जिसमे तनिक भी शांति नहीं, वही नशा है। स्वामी जी के अनुसार अवसाद से मुक्ति का उपाय नशा नहीं अपितु इस मानसिक व्याधि को खत्म करने के लिए आत्मिक शक्ति के विकास की आवश्यकता है। हमारे राष्ट्र भक्तों ने राष्ट्र भक्ति का नशा किया और चारित्रिक विकास से ओतप्रोत हो भारत माता को स्वतंत्रता दिलाई। चरित्र भारत भूमि का आधार है और आज उसी धर्म भूमि भारत में अधिकतर युवा शक्ति का चारित्रिक पतन हो रहा है। आवश्यकता है कि युवाओं को ब्रह्मज्ञान की शक्ति से जाग्रत होकर राष्ट्र में अग्रगण्य भूमिका निभाने की। आज के युवाओं के आदर्श यदि स्वामी विवेकानंद, शिवाजी, दयानन्द सरस्वती, चाणक्य इत्यादि होंगे तो भारत को फिर से “जगतगुरु” के पद पर आसीन किया जा सकता है।
कार्यक्रम में कारगार अधीक्षक सुशील ठाकुर की भी सहर्ष उपस्थिति रही। इस अवसर पर चरित्र रक्षण करने और नैतिक मूल्यों से ओतप्रोत होने के लिए स्वामी जी ने युवा शक्ति को जागरूक किया। इसी उपलक्ष्य पर महात्मा बलदेव व राज कुमार ने क्रन्तिकारी राष्ट्र भक्ति के गीत गाकर कैदी बंधु जनों के हृदयों में देश भक्ति की भावना का प्रसार किया। समस्त कैदी बंधुओं ने कार्यक्रम की भूरि भूरि प्रशंसा की। कार्यक्रम के अंत में कारागार अधीक्षक सुशील ठाकुर ने संस्थान का राष्ट्र विकास के लिए चलाये जा रहे सामाजिक प्रकल्पों के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया।

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