
कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 26 अगस्त : श्री दुर्गा देवी मन्दिर पिपली (कुरुक्षेत्र) के पीठाधीश डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि इस वर्ष रक्षा बंधन का त्योहार 28 अगस्त, 2026 शुक्रवार को मनाया जाएगा।
हिंदू परंपराओं के अनुसार रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के स्नेह के साथ सामाजिक संबंध को मजबूत बनाता है। रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाईयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधते हुए आरती उतारती हैं और भगवान से उनके जीवन में सुख-समृद्धि और लंबी आयु कामना करती हैं।
भाई का मुख राखी बंधवाते समय पूर्व या उत्तर दिशा में सुख समृद्धि और आरोग्यता प्रदान करता है।
रक्षासूत्र का मंत्र है- येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।
इस मंत्र का सामान्यत: यह अर्थ लिया जाता है कि दानवों के महाबली राजा बलि जिससे बांधे गए थे, उसी से तुम्हें बांधता हूं। हे रक्षे ! रक्षासूत्र तुम चलायमान न हो, चलायमान न हो। धर्मशास्त्र के विद्वानों के अनुसार इसका अर्थ यह है कि रक्षा सूत्र बांधते समय ब्राह्मण या पुरोहत अपने यजमान को कहता है कि जिस रक्षासूत्र से दानवों के महापराक्रमी राजा बलि धर्म के बंधन में बांधे गए थे अर्थात धर्म में प्रयुक्त किए गये थे, उसी सूत्र से मैं तुम्हें बांधता हूं, अर्थात धर्म के लिए प्रतिबद्ध करता हूं। इसके बाद पुरोहित रक्षा सूत्र से कहता है कि हे रक्षे तुम स्थिर रहना, स्थिर रहना। इस प्रकार रक्षा सूत्र का उद्देश्य ब्राह्मणों द्वारा अपने यजमानों को धर्म के लिए प्रेरित एवं प्रयुक्त करना है।
शुभ मुहूर्त राखी बांधने का समय: सुबह 5:57 बजे से लेकर सुबह 9:48 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक।
रक्षा बन्धन पर धार्मिक मान्यता : प्रात: उठकर स्नान करके यमुना व उनके भाई यमराज को प्रणाम करना चाहिए I मृत्यु के देवता यम को उनकी बहन यमुना ने इसी दिन राखी बांधी और अमर होने का वरदान दिया। यम ने इस पावन दिन को अक्षुण्ण रखने के लिए घोषणा की जो भाई इस दिन अपनी बहन से राखी बंधवाएगा और उसकी रक्षा करने का वचन देगा। वहां मेरे दूत नही जांऐगे और उसकी अकाल मृत्यु नही होगी। इस पर्व के पीछे यह भाव है कि समाज में रहने वाले लोग मिलजुल कर रहें और जरूरत पडऩे पर एक दूसरे की सहायता कर सके। यह पर्व भाईयों को शक्तिशाली होने का बोध कराता है। जिन भाईयों की बहने नही होती वे भी अपनी मुंहबोली बहन,चाहे वह किसी भी धर्म की हो, उनसे बड़े प्रेम और श्रद्धा से राखी बंधवानी चाहिए।


