
नारी सशक्तिकरण की दिशा में कुवि का सराहनीय प्रयास
आंतरिक शिकायत समिति ने सुरक्षित, संवेदनशील और सम्मानजनक वातावरण को दी मजबूती।
कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 25 मई : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समानता सुनिश्चित करने की दिशा में एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) ने वर्ष 2025 में ऐसा सुरक्षित, संवेदनशील और विश्वासपूर्ण वातावरण विकसित किया, जहाँ पूरे वर्ष यौन उत्पीड़न से संबंधित एक भी शिकायत दर्ज नहीं हुई। यह उपलब्धि केवल प्रशासनिक सफलता नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित पारदर्शिता, जागरूकता और मानवीय मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति मानी जा रही है।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने बताया कि आंतरिक शिकायत समिति केवल शिकायतों के निवारण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य महिलाओं के लिए ऐसा शैक्षणिक एवं कार्यस्थलीय वातावरण तैयार करना है, जहाँ वे पूर्ण सम्मान, आत्मविश्वास और सुरक्षा के साथ कार्य एवं अध्ययन कर सकें। समिति द्वारा महिलाओं के विरुद्ध यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और निवारण के लिए प्रभावी नीतियाँ लागू की गई हैं तथा शिकायतों के निष्पक्ष, गोपनीय और समयबद्ध समाधान हेतु मजबूत तंत्र विकसित किया गया है।
आंतरिक शिकायत कमेटी की चेयरपर्सन प्रो. सुनीता सिरोहा ने बताया कि किसी भी शिक्षण संस्थान की वास्तविक पहचान केवल शैक्षणिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उसके मानवीय और सामाजिक मूल्यों से होती है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए ऐसा वातावरण निर्मित कर रहा है, जो हर छात्रा, शोधार्थी, शिक्षिका और कर्मचारी में विश्वास और आत्मबल पैदा करता है। प्रो. सुनीता सिरोहा ने बताया कि महिला सुरक्षा और लैंगिक समानता को व्यवहारिक रूप देने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय में वर्षभर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम, कार्यशालाएँ, व्याख्यान, संवाद सत्र एवं प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से “कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं निवारण) अधिनियम-2013” की जानकारी दी गई तथा सभी वर्गों को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया गया।
लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि आंतरिक शिकायत समिति द्वारा आयोजित “जेंडर सेंसिटाइजेशन” विषयक विशेष व्याख्यानों ने विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों में संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत किया। विशेष रूप से छात्राओं और वंचित वर्ग की महिलाओं के लिए आयोजित जागरूकता सत्रों में महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनी अधिकारों और सहायता तंत्र की जानकारी देकर उनमें आत्मविश्वास का संचार किया गया। उन्होंने कहा कि जब संस्थान संवेदनशीलता, समानता और सम्मान को अपनी कार्य संस्कृति का हिस्सा बना लेते हैं, तब सुरक्षित और सशक्त समाज की मजबूत नींव तैयार होती है।


