
“यह बजट जनसरोकारों से दूर केवल आंकड़ों की बाजीगरी और विज्ञापनों का मायाजाल है, जिसमें मध्यम वर्ग और गरीबों के लिए कोई राहत नहीं है। युवाओं को स्थायी रोजगार देने के बजाय सरकार उन्हें लैपटॉप-स्मार्टफोन के नाम पर बहला रही है, जबकि महंगाई और कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। किसान आज भी आवारा पशुओं और एमएसपी की समस्या से जूझ रहा है, लेकिन बजट में उनके लिए केवल खोखले वादे ही नजर आते हैं। वास्तव में, यह उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर का सपना दिखाकर जनता की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज करने वाला दिशाहीन बजट है।”
कौशल कुमार सिंह ‘ मुन्ना राय ‘


