
श्री योग अभ्यास आश्रम ट्रस्ट के स्यात योग सम्मेलन में योग और आध्यात्म का महासंगम।
कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक/ वरुण कौशिक 26 अप्रैल : श्री योग अभ्यास आश्रम ट्रस्ट (स्यात) द्वारा आयोजित स्यात योग सम्मेलन स्वामी अमित देव जी के सान्निध्य में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें लगभग 3000 से अधिक लोगों की उपस्थिति रही। यह आयोजन योग को एक समग्र जीवन पद्धति के रूप में प्रस्तुत करने वाला एक प्रभावशाली मंच बना।
अपने संबोधन में स्वामी अमित देव जी महाप्रभु योग योगेश्वर रामलाल जी महाराज एवं योग योगेश्वर देवीदयाल जी महाराज को याद करते हुए कहा,
“योग मतलब जोड़ना है, और यही इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है—योग, आयुर्वेद, वास्तु और ज्योतिष का संगम।”
उन्होंने योग को केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि शरीर, मन और चेतना के संतुलन का माध्यम बताया।
सम्मेलन में योग और ध्यान सत्र, आध्यात्मिक प्रवचन तथा ज्योतिष, अंक विद्या और समग्र उपचार पर आधारित संवाद आयोजित किए गए। ‘अलमाइटी अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन’ के सहयोग से यह आयोजन पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वेलनेस दृष्टिकोण के समन्वय का एक सशक्त उदाहरण बना।
स्यात द्वारा प्रस्तुत योग प्रदर्शन में षटकर्म क्रिया के पांच अंगों का विशेष प्रदर्शन किया गया, जिसने प्राचीन योग परंपरा की गहराई और वैज्ञानिकता को प्रभावी रूप से दर्शाया।
कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में जादूगर सम्राट शंकर की प्रस्तुति और एमआर विवेकानंद स्कूल के बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल रहे, जिन्होंने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर षडदर्शन साधुसमाज के संगठन सचिव वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक (कुरुक्षेत्र), चंद्रशेखर जोशी (देहरादून) तथा सुनील कुमार जांगड़ा (फरीदाबाद) सहित विशिष्ठ अतिथियों को विशेष अतिथि के रूप में सम्मानित किया गया।
यह सम्मेलन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि योग जीवन को संतुलित,सार्थक और ऊर्जावान बनाने की एक संपूर्ण पद्धति है।


