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पुस्तकें हमें अपनी सभ्यता एवं संस्कृति से जोड़ती हैं : प्रो. संजीव शर्मा

पुस्तकें हमें अपनी सभ्यता एवं संस्कृति से जोड़ती हैं : प्रो. संजीव शर्मा।

वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक।

केयू पंजाबी विभाग में ’उस्ताती ए कवि साईं मियां मीर जी’ पुस्तक पर व्याख्यान आयोजित।

कुरुक्षेत्र, 23 अप्रैल : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में पंजाबी विभाग द्वारा ’उस्ताती ए कवि साईं मियां मीर जी’ पुस्तक पर एक परिचर्चा में केयू पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. संजीव शर्मा ने बतौर मुख्य वक्ता कहा कि पुस्तकें हमें अपनी सभ्यता एवं संस्कृति से जोड़ने का कार्य करती है। इसके साथ ही इनकों पढ़ने से हमें ऐतिहासिक घटनाओं एवं सांस्कृतिक परम्पराओं को जानने का अवसर भी मिलता है। इस मौके पर पंजाबी विभाग के अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं परिचय करवाया तथा साईं मियां मीर जी के विस्तार से बताया।
कार्यक्रम में कविश्री विकास मंच, तलवंडी साबो, पटियाला के दर्शन सिंह पसियाना ने दूसरे मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि धर्म और सत्य का संबंध घनिष्ठ है। उन्होंने कहा कि साईं मियां मीर और जहांगीर की धर्म के प्रति कैसी भावना थी ? यह इस पुस्तक से स्पष्ट हो जाता है। 33 कवियों की रचनाओं से युक्त यह पुस्तक कविशरी काव्यात्मक रूप में लिखी गई है, जिसमें विराम चिन्हों पर विशेष ध्यान दिया गया है। कुलवंत सिंह सैदोके ने कहा कि यह पुस्तक साईं मियां मीर के बारे में है जिन्होंने हरमंदिर साहिब की नींव रखी थी। उन्होंने छात्रों को छंद के नियमानुसार तथा कविशरी के मधुर शब्दों के माध्यम से कविता लिखने की विधि भी साझा की। सुंदरपाल कौर राजासांसी, संरक्षक साई मियां मीर हंबल फाउंडेशन, कनाडा ने बतौर विशिष्ट अतिथि साईं मियां मीर जी द्वारा हरमंदिर साहिब के मैदान में जातिगत भेदभाव को दूर करने की बात कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. पुष्पा रानी अधिष्ठाता, कला एवं भाषा संकाय ने सुंदरपाल कौर राजासांसी के व्यक्तित्व और कार्य के प्रति समर्पण के बारे में बताया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. लता खेड़ा व धन्यवाद डॉ. गुरप्रीत सिंह साहूवाला द्वारा किया गया। इस अवसर पर शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

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