कर्मा महोत्सव के अंतिम दिन देश–के साथ नेपाली कलाकारों ने बिखेरी आध्यात्मिक छटा

मुरथल, वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक : समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया के सान्निध्य में 500 से अधिक साधकों ने साधना और उत्सव में लिया सहभागी।
बिक्रमगंज अनुमंडल अंतर्गत सूर्यपुरा प्रखंड के ओशो धारा करमा धाम गांव के त्रिवीर पब्लिक स्कूल के प्रांगण में आयोजित करमा महोत्सव का छठा और अंतिम दिन भक्ति, ध्यान और सांस्कृतिक विविधता की रंगीन छटा से सराबोर रहा। देशभर के साथ-साथ विदेशों से आए साधकों और कलाकारों ने समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया को समर्पित अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। महोत्सव के समापन दिवस पर त्रिवीर पब्लिक स्कूल के बच्चों ने भी एक से बढ़कर एक अद्भुत कार्यक्रम प्रस्तुत किए। जम्मू–कश्मीर से उज्ज्वल, सरिता समेत 15 साधक; हरियाणा से आचार्य सुभाष, गगन, साक्षी, राजू, दलशेर सहित 50 साधक; कनाडा से स्वामी रोहन, अंजलि समेत 15 भक्त; पंजाब से गुरमीत, गुरिंदर सहित 35 साधक; गुजरात से आचार्य चेतन, बिपिन रावल, प्रार्थना, श्रद्धा समेत 120 साधक; झारखंड से आचार्य ज्ञानामृत, अमरेश, वीणा, सुनीता सहित 55 साधक; छत्तीसगढ़ से आचार्य दर्शन, संतोष चंद्र सहित 52 साधक; दिल्ली से जोगिंदर, निधि सहित 20 लोग; तेलंगाना से जितेंद्र, अनुभव समेत 5 भक्त; बिहार से अनामिका, ओजस, विकास, विकेश, दीपक, रंजू, हर्ष समेत 100 से अधिक साधक तथा उत्तर प्रदेश से अरुणिमा, रोहित, पुष्पांजलि सहित 35 भक्त पहुंचे। नेपाल से महिला शक्ति के लिए सक्रिय मंजू,अमेरिका से मां आभा तथा कुल मिलाकर देश–दुनिया से 500 से अधिक साधक समर्थगुरु धारा धाम, करमा में साधना और उत्सव मनाने पहुंचे। त्रिवीर पब्लिक स्कूल के नृत्य शिक्षक अनोप जी ने बच्चों के साथ भक्ति और संस्कृति से ओतप्रोत आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं, जिन्हें दर्शकों ने भरपूर सराहा।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संयोजक आचार्य आलोक ने सभी कलाकारों और उपस्थित साधकों के प्रति आभार व्यक्त किया। महोत्सव के अंतिम सत्र में समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया ने अपने प्रेरक आशीर्वचनों से कार्यक्रम का समापन किया। उन्होंने कहा—
“अपने भीतर प्रेम का स्तर बढ़ाने से आनंद और चैतन्य स्वतः बढ़ जाते हैं। भारत को पुनः अपनी सांस्कृतिक विरासत को जगाने के लिए ध्यान, प्रेम और भक्ति को सांसारिक जीवन के साथ जोड़कर चलना होगा। त्रिवीर पब्लिक स्कूल के बच्चे इस मार्ग में मशालधारी बनेंगे।”महोत्सव के अंत में देश–दुनिया से आए साधकों ने समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की और अगले वर्ष आयोजित होने वाले करमा महोत्सव (26–31 अक्टूबर 2026) में पुनः उपस्थित होने का संकल्प लिया। करमा महोत्सव का यह समापन दिवस भक्ति, प्रेम, आध्यात्मिक उत्कर्ष और सांस्कृतिक समृद्धि की अविस्मरणीय स्मृति बनकर साधकों के हृदय में अंकित रह गया। बिहार कोर्डिनेटर प्रभात, आचार्य अंशु, कल्चरल कोर्डिनेटर आलोक, केंद्रीय कोर्डिनेटर आचार्य दर्शन, बिक्रम सिद्धार्थ, पुलकित,सुशी, मां श्रद्धा ज्योत्स्ना, अनामिका,सुनीता इत्यादि मौजूद रहे।

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