खिचड़ी भोज से बढ़ती है सामाजिक समरसता और भाईचारा= महंत शिव सागर

खिचड़ी भोज से बढ़ती है सामाजिक समरसता और भाईचारा= महंत शिव सागर
सगड़ी (आजमगढ़):खिचड़ी भोज में सामाजिक समरसता का भाव होता है क्योंकि यह समाज के सभी वर्गों को एक साथ जोड़ता है। सभी लोग चाहे उनकी जाति या पृष्ठभूमि कुछ भी हो समान रूप से भोजन करते हैं। यह परंपरा कबीर दास और रहीम दास के समय से चली आ रही है।
अजमतगढ़ के श्री सन्यासी संस्कृत महाविद्यालय एवं मठ रजादेपुर में आयोजित खिचड़ी भोज में उपस्थित श्रद्धालुओं को खिचड़ी की महत्ता का भान कराते हुए महंत शिवसागर भारती ने यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि यह परंपरा सामाजिक भेदभाव को खत्म करती है, जहाँ सभी को एक ही पंक्ति में बैठाकर खिचड़ी खिलाई जाती है। जगन्नाथपुरी में कबीर और रहीम के साथ भोजन करने से पंडितों के मना करने पर चमत्कार से सभी को सबक दिया गया। मकर संक्रांति जैसे अवसरों पर खिचड़ी का भोज सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देता है।
खिचड़ी, जो चावल और दाल से बनती है, एक साधारण व्यंजन है लेकिन यह सभी को एक साथ लाने का एक शक्तिशाली प्रतीक बन जाती है। भोज के अवसर पर मैथ में भजन का आयोजन किया गया जिसमें गुड्डू राय भजन गायक ने एक से बढ़कर भजन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर काफी लोग उपस्थित रहे




