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होलाष्टक में भगवान का सुमिरन करना श्रेष्ठ है : समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया

कुरुक्षेत्र, (प्रमोद कौशिक) 24 फरवरी: श्री दुर्गा देवी मंदिर पिपली,कुरुक्षेत्र के पीठाधीश और समर्थगुरु धारा हिमाचल के जोनल कोऑर्डिनेटर आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने संकीर्तन में बताया कि होलाष्टक का समय बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन मांगलिक कार्यों के लिए यह समय बहुत अशुभ माना जाता है। होलाष्टक 24 फरवरी 2026 से 3 मार्च 2026 तक रहेंगे।
आप होलाष्टक में क्या मत करें ?
होलाष्टक के दौरान मांगलिक काम जैसे कि शादी,सगाई, मुंडन और नामकरण जैसे कामों से बचना चाहिए।
नया घर खरीदना, भूमि पूजन,गृह प्रवेश व नई गाड़ी लेने से बचना चाहिए।
नया व्यवसाय आरम्भ करने से भी बचना चाहिए।
तामसिक चीजों से दूर रहना चाहिए।
किसी की भी निंदा चुगली मत करें।
आप होलाष्टक में क्या करें ?
होलाष्टक के समय अपनी सामर्थ्य अनुसार गरीबों को अन्न और वस्त्र का दान करें। जीव जंतुओं,पक्षियों,कुत्तों को अन्न और जल आदि देवें। गौशाला में सेवा करें। पेड़ पौधों को जल देवें। धार्मिक स्थानों की सेवा करें। वहाँ की आवश्यकता अनुसार वस्तुओं को दान श्रद्धा पूर्वक करें।
अपने सदगुरु , इष्ट देव , इष्ट देवी, भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा अर्चना के साथ आरती करें।
यदि आपके गुरु ने मंत्र और सुमिरन की विधि दी है तो उनके नियम अनुसार जरूर करें।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय, ॐ शिवाय नमः, ॐ हनुमते नमः, और ॐ दुर्गायै नमः आदि मंत्र का जाप अपनी श्रद्धा अनुसार करें।
जय गुरुदेव, वाहे गुरु, जय सिया राम, राधे राधे, राधे कृष्ण, जय गोविन्द जय गोपाल,जय भोलेनाथ ,जय माता दी आदि का जाप, ध्यान, सुमिरन अपनी श्रद्धा अनुसार करना बहुत शुभ माना जाता है।
सोमवार 2 मार्च 2026 को प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा में होलिका दहन किया जायेगा । मंगलवार 3 मार्च 2026 को खग्रास चन्द्र ग्रहण सम्पूर्ण भारत में रहेगा I जिसका सूतक प्रातः 6 बजकर 20 मिनट से प्रारम्भ हो जायेगा I ग्रहण स्पर्श सायं 3 बजकर 20 मिनट से आरम्भ और ग्रहण समाप्ति 6 बजकर 47 मिनट पर होगी I
होली का त्यौहार इस बार बुधवार 4 मार्च 2026 को मनाया जाएगा।
जातक को पूजा करते वक्त पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठना चाहिए।
होलिका से जुड़ी कथा के अनुसार कहा जाता है कि होलाष्टक के दिन से भक्त प्रहलाद को कारागार में बंद कर दिया गया था और होलिका में जलाने की तैयारी की गई थी।
वहीं दूसरी कहानी के अनुसार कहा जाता है कि भगवान शिव ने होलाष्टक के दिन में कामदेव को भस्म किया था।
होली का आध्यात्मिक महत्त्व : होलिका दहन के आध्यात्मिक अर्थ में हम सभी अपनी बुराईयों को योग अग्नि में स्वाहा करें ।
ट्वीटर के माध्यम से आदरणीय समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया ने बताया कि अहोभाव क्या है? जितना है तुम्हारे पास, उसके लिए तुम्हारे भीतर संतोष भाव है कि जो हम डिजर्व करते थे, हे परमात्मा ! तुमने उससे ज्यादा हमें दिया है। इसके लिए धन्यवाद है। हम धन्यभागी हैं कि हमारे पास इतना कुछ है। इसका नाम है अहोभाव।
श्री दुर्गा देवी मंदिर पिपली की संकीर्तन मंडली के गायिका शिमला धीमान,आशा कवातरा, पायल सैनी, कोमल मेहरा,निशा अरोड़ा, सुरेन्द्र कौर, सुमित्रा पाहवा और भक्त सुशील तलवाड़ ने सुंदर भेंटे गाई और सुन्दर नृत्य किया।
पुजारी पंडित राहुल मिश्रा ने पूजा अर्चना करवाई।

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