सांग महोत्सव के समापन पर राजा उत्तानपात,धर्म की जीत,विराट पर्व और बणदेवी सांग से कलाकारों ने मोहा दर्शकों का मन

कुरुक्षेत्र, (प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी) 27 फरवरी : सूचना, जनसम्पर्क एवं भाषा विभाग द्वारा कला कीर्ति भवन की भरतमुनि रंगशाला में चल रहे पांच दिवसीय सांग उत्सव के समापन पर हरियाणा के अलग-अलग हिस्सों से आए सांग कलाकारों ने बेहतरीन सांग मंचन किये। जिसमें राजेंद्र सिंह ने बणदेवी, रमेश कुमार और रामशरण शर्मा ने धर्म की जीत, पंडित लख्मीचंद के पौत्र विष्णुदत्त कौशिक ने विराट पर्व तथा बाबूलाल सांगी ने राजा उत्तानपात का मंचन किया। सांग उत्तानपात में कलाकारों ने दिखाया कि अवधपुरी में राजा उत्तानपात राज करते हैं। जिसकी सनेहगढ़ में रानी सुनीती के साथ शादी होती है। काफी दिन बीतने के बाद उनकी कोई संतान नहीं होती। एक दिन रानी उदासी में बैठी थी कि नारदजी आते हैं और पूछते हैं कि आप उदास क्यों हैं। रानी सुनीति बताती है कि रोउ सूं रंग महल में, मेरे हुई नहीं कोई संतान तो नारद ने पति का दोबारा ब्याह करवाने की बात कही। इसके बाद रानी ने अपनी छोटी बहन सुरुचि की शादी अपने पति से करवाने के लिए अपनी मां को मनाया और बहन की शादी राजा से करवाई। लेकिन बहन इस शादी से खुश नहीं थी, क्योंकि उसकी शादी बूढ़े राजा से हो रही थी। इसका बदला लेने के लिए उसकी बहन ने राजा से बीच फेरों में चार वचन भरवाए और चौथे वचन में अपनी बहन को राजपाठ से बाहर जंगल में छोडऩे की बात मनवाली। रानी सुरूचि से राजा को संतान हो इसलिए सुनीति खुशी से जंगल में चली गई। कुछ दिन बाद राजा शिकार खेलने जाता है और रास्ते में तूफान आ जाता है। राजा तूफान से बचने के लिए रानी सुनीति की कुटिया में पनाह लेता है। जहां रात्रि मिलन से रानी सुनीति को ध्रुव के रुप में बेटा प्राप्त होता है उधर छोटी रानी से बेटा उत्तम पैदा होता है। एक दिन उत्तम का जन्मदिन होता है और राज्य में ढोल की आवाज सुनकर ध्रुव भी राजमहल में जाने की इच्छा प्रकट करता है। लेकिन उसकी मां मना कर देती है। मां की बात को अनसुना करके ध्रुव चला जाता है और जाकर राजा की गोद में बैठ जाता है। राजा जब ध्रुव से उसका परिचय पूछता है तो वह बताता है कि वह उतानपात का लडक़ा है। मां का नाम सुनीती है जो महल में दूर रहती है। छोटी रानी ने यह सुनकर उसे राजा की गोद से नीचे गिरा दिया और कहा कि अगर गद्दी पर बैठना है तो मेरे गर्भ से पैदा होता। ध्रुव कहता है कि राज लेंगे तो भगवान से मांगेगे। इतना कहकर ध्रुव चला जाता है। महल से जाने के बाद ध्रुव भगवान की तपस्या में लीन हो जाता है और ईश्वर की भक्ति प्राप्त करने के बाद ध्रुव भगत के रूप में प्रसिद्ध होता है।
बचपन में विवाह के कारण धर्म को मिला जीवन और हुई धर्म की जीत।
सांग धर्म की जीत में कलाकारों ने दिखाया कि काशी शहर में पंडित रामदयाल और उनकी पत्नी शांता देवी रहती है। उनके घर में जो भी संतान पैदा होती वो जन्म लेते ही मर जाती। तब एक ज्योतिषि पंडित रामदयाल को कहता है कि उनके घर एक लडक़े का जन्म होगा, अगर उस लडक़े के जन्म लेते ही उसका विवाह करवा दिया गया तो वह बच जाएगा। कुछ समय के बाद रामदयाल के घर में लडक़ा पैदा होता है जिसका नाम धर्म रख दिया जाता है। बच्चे के पैदा होते ही उसका विवाह मादोपुर के पंडित की जीत नामक बडी बेटी के साथ कर दिया जाता है। धर्म और जीत जब जवान हो जाते हैं तो हैं तो जीत की अपेक्षा मादोपुर पंडित की छोटी बेटी विजया धर्म पर आकर्षित हो जाती है। सांग में अनेक कठिनाईयों के बाद धर्म अपनी पत्नी जीत से मिलता है और विजया का घमण्ड तोड़ता है। इस तरह सांग महोत्सव में अलग-अलग किस्सों से कलाकारों ने दर्शकों का मन मोहा।




