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पशु चिकित्सकों के लिए 10 दिवसीय “क्लीनिकल डायग्नोस्टिक अल्ट्रासाउंड” प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन

हरियाणा संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक दूरभाष – 94161 91877

हिसार,14 मार्च : लाला लाजपत राय पशुचिकित्सा एवं पशुविज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), हिसार में कुलपति प्रो. (डॉ.) विनोद कुमार वर्मा के मार्गदर्शन में हरियाणा पशुपालन एवं डेयरी विभाग में कार्यरत पशु चिकित्सकों के लिए आयोजित 10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “क्लीनिकल डायग्नोस्टिक अल्ट्रासाउंड फॉर वेटरनरी सर्जन्स” का समापन समारोह उत्साहपूर्वक आयोजित किया गया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विश्वविद्यालय के पशुचिकित्सा महाविद्यालय के सर्जरी विभाग तथा पशु चिकित्सा नैदानिकी विभाग द्वारा हरियाणा पशु चिकित्सा प्रशिक्षण संस्थान के सहयोग से आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य पशु चिकित्सकों को आधुनिक अल्ट्रासोनोग्राफी तकनीक से परिचित कराना तथा बड़े और छोटे पशुओं में विभिन्न रोगों के सटीक निदान के लिए उनकी दक्षता को बढ़ाना था।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि पशुचिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. मनोज कुमार रोज़ रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा सरकार के पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. सुखदेव राठी ने की।
अपने संबोधन में मुख्य अतिथि अधिष्ठाता डॉ. मनोज कुमार रोज़ ने कहा कि पशु चिकित्सा विज्ञान में अल्ट्रासाउंड तकनीक आज के समय में अत्यंत महत्वपूर्ण उपकरण बन चुकी है। इसके माध्यम से पशुओं में गर्भावस्था की जांच, प्रजनन संबंधी समस्याओं का निदान तथा आंतरिक अंगों जैसे यकृत, गुर्दे, मूत्राशय और हृदय से संबंधित रोगों का सटीक पता लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम पशु चिकित्सकों को नवीनतम तकनीकों से अपडेट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए निदेशक डॉ. सुखदेव राठी ने कहा कि हरियाणा जैसे पशुधन समृद्ध राज्य में आधुनिक निदान तकनीकों का उपयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अल्ट्रासोनोग्राफी के माध्यम से पशुओं में बीमारियों का प्रारंभिक स्तर पर पता लगाकर समय पर उपचार संभव है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से भी बचाया जा सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान और कौशल का उपयोग फील्ड स्तर पर करते हुए पशुपालकों को बेहतर पशु चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के कोर्स निदेशक, पशु शल्य एवं रेडियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष डॉ. आर. एन. चौधरी ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि 10 दिनों तक चले इस प्रशिक्षण में विभिन्न क्षेत्रों से आए पशु चिकित्सकों को अल्ट्रासाउंड तकनीक के सिद्धांतों के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान बड़े पशुओं जैसे गाय, भैंस और घोड़े तथा छोटे पशुओं जैसे कुत्ते और बिल्लियों में अल्ट्रासोनोग्राफी के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी प्रदान की गई।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में प्रजनन तंत्र की जांच, गर्भावस्था का निदान, भ्रूण की स्थिति का आकलन, पेट के अंगों जैसे यकृत, गुर्दे, प्लीहा और मूत्राशय की जांच तथा मस्कुलोस्केलेटल और सॉफ्ट टिश्यू संबंधी रोगों की पहचान के लिए अल्ट्रासोनोग्राफी के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। इसके साथ ही प्रतिभागियों को लाइव एनिमल डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया, जिससे उन्हें फील्ड में कार्य करने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। इस कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. ज्ञान सिंह और डॉ. तरुण गुप्ता द्वारा व मंच संचालन डॉ. प्रियंका द्वारा किया गया, जिन्होंने प्रशिक्षण की रूपरेखा तैयार करने, विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित करने तथा प्रायोगिक सत्रों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. एस. एस. ढाका, जनसम्पर्क अधिकारी डॉ. निलेश सिन्धु, हरियाणा पशु चिकित्सा प्रशिक्षण संस्थान डॉ. राजीव बांगड़ व डॉ. रविद्र सैनी, डॉ. दीपक तिवारी, डॉ. नीरज अरोड़ा, डॉ. विजय जाधव, डॉ. सुखदीप वोहरा, डॉ. आनन्द पाण्डेय, वैज्ञानिक, प्राध्यापक एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
समापन समारोह के दौरान प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए तथा सभी प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया। अंत में कोर्स समन्वयक डॉ. ज्ञान सिंह ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी मुख्य अतिथियों, अध्यक्ष, विशेषज्ञों तथा प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
विश्वविद्यालय के जनसम्पर्क अधिकारी डॉ. निलेश सिन्धु ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य पशु चिकित्सकों को नवीनतम तकनीकों से अवगत कराना तथा उनकी व्यावहारिक दक्षता को बढ़ाना है, जिससे वे फील्ड स्तर पर पशुपालकों को बेहतर एवं प्रभावी पशु चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर सकें।

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