नई पीढ़ी में सकारात्मक सोच पैदा करती है स्टार्टअप संस्कृति- कुलपति

नई पीढ़ी में सकारात्मक सोच पैदा करती है स्टार्टअप संस्कृति,
………कुलपति
उद्यमशीलता के माध्यम से अपने अंदर की आग को रास्ता दिखाते हैं नवयुवक,
..डॉ0 नरेंद्र सिसोदिया
आजमगढ़। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय आजमगढ़ के फैसिलिटी सेंटर में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए बृहद ओरिएंटेशन प्रोग्राम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में साउथ एशिया स्टार्टअप प्रोग्राम के हेड डॉ. निरर्पेंन भट्ट एवं श्यामा प्रसाद मुखर्जी इन्नोवेशन एंड इक्यूवेशन फाउंडेशन के निर्देशक डॉ. नरेंद्र सिसोदिया, कुलसचिव डॉ0 अंजनी कुमार मिश्र एवं विश्वविद्यालय स्टार्टअप कार्यक्रम के निदेशक सहायक कुलसचिव डॉ0 महेश श्रीवास्तव ने समेकित रूप से मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए दीप प्रज्वलित कर किया।
विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी ने बताया कि परिसर में गठित श्यामा प्रसाद मुखर्जी इन्नोवेशन एंड इक्यूवेशन फाउंडेशन के तत्वाधान में बृहद कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें राजकीय, अशासकीय महाविद्यालय के प्राचार्य एवं प्राचार्या स्वयं या प्रतिनिधि के साथ-साथ ऊर्जावान छात्र- छात्राओं ने सहभाग किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर संजीव कुमार ने कहा कि स्टार्टअप नई पीढ़ी के लिए संजीवनी सरीखी है यदि पठन-पाठन के अतिरिक्त छात्र एवं छात्राएं अपना स्किल डेवलपमेंट करना चाहते है तो विश्वविद्यालय न सिर्फ उन्हें उचित मंच प्रदान करेगा बल्कि नवाचार प्रस्तुत करने पर उन्हें विश्वविद्यालय में रोजगार परक दायित्व भी सौंपेगा, इससे छात्र पठन-पाठन के साथ-साथ आर्थिक तंगी से भी उभर सकते हैं। जहां तक स्टार्टअप का प्रश्न है यह न केवल छात्र-छात्राओं को रोजगार पाने वाला बना सकता है बल्कि रोजगार देने वाला भी बना सकता है । छात्रों की तरफ मुखातिब होते हुए उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इको सिस्टम बन चुका है। आत्मनिर्भरता व स्वरोजगार के माध्यम से हम उद्यमशीलता को अपना स्टेटस सिंबल भी बना सकते हैं। कोई कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता है काम सिर्फ काम है यदि शून्य से हम शुरू करें तो बड़े लक्ष्य की उत्तरोत्तर प्राप्ति कर सकते है। आवश्यकता है नई पीढ़ी अपनी मानसिकता में बदलाव लाए क्योंकि यह सतत क्रियाशील रहने का कार्य है स्टार्टअप संस्कृति ने पहले असफलता फिर शनैः शनैः सफलता को प्राप्त किया है। विश्वविद्यालय ने श्याम प्रसाद मुखर्जी संस्थान के नाम से एक वेबसाइट भी लॉन्च की है इच्छुक अभ्यर्थी उसके माध्यम से अपनी जिज्ञासा शांत कर सकते हैं।
मुख्य अतिथि के रूप में पधारे रीनर और रॉक के हेड निरर्पेन भट्ट ने उद्यमशीलता की महत्ता को बताते हुए नई पीढ़ी को पूरे मनोयोग से लग जाने को कहा। छात्र-छात्राओं के प्रश्नों का उत्तर देते हुए उन्होंने नई पीढ़ी की ऊर्जा को सैल्यूट किया। परिसर के छात्र सत्यम द्विवेदी द्वारा कृषि नर्सरी के क्षेत्र में स्टार्टअप की संभावनाओं के बाबत प्रश्न किया तो उन्होंने इसे बड़ी मार्केट बताकर छात्र की जिज्ञासा शांति की। परिसर के छात्र शिवम द्वारा द्वारा कॉस्मेटिक के क्षेत्र में स्टार्टअप की संभावनाओं पर प्रश्न किया तो भट्ट जी ने कहा कि इस क्षेत्र में समाज की उद्यमशीलता से उम्मीदों का पहाड़ खड़ा है यह वृहद बाजार है जो सूजी कंपनी एवं जोमैटो की होम डिलीवरी के माध्यम से महिलाओं के मेकअप रूम तक पहुंच गया है। उन्होंने फेसबुक के पहले याहू आदि की चर्चा करते हुए कहा कि अब AI के माध्यम से आप वेबसाइट आदि आसानी से बन सकता है। दक्षिण भारत के सुब्रमण्यम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया में जो कुछ बड़ा होता है हम भारतीयों द्वारा ही किया जाता है। जहां तक MIT संस्था का प्रश्न है यह क्षेत्र यहूदियों के लिए ज्यादा सुरक्षित है क्योंकि अभी हमारी पकड़ वहां तक नहीं पहुंच सकी है जहां तक बुद्ध की मैपिंग का प्रश्न है हमारे अंदर कितनी ऊर्जा है उसे हम रास्ता दिखाते हैं।
अंत में प्राचार्य प्रो. संत कुमार यादव द्वारा स्टार्टअप फाउंडेशन का गठन करने के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति जी की सराहना की तथा यह मांग की कि आवश्यकता पड़ने पर विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों के माध्यम से महाविद्यालय में भी उद्यमशीलता कार्यक्रम आयोजित किया जाए। अंत में उन्होंने आयोजन समिति के सभी सदस्यों विशेष तौर से डॉ नरेंद्र सिसोदिया डॉ. महेश श्रीवास्तव, डॉ. प्रवेश सिंह, डॉ. जयप्रकाश, डॉ प्रदीप डॉक्टर संदीप डॉ विशाल डॉ प्रेमचंद डॉ रजनीश एवं बीवी परिसर के प्राध्यापक गण गैर शैक्षणिक कर्मचारी संख्या में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति एवं उनके द्वारा पूछे गए प्रश्नों के प्रति धन्यवाद दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ ऋतंभरा ने किया।




