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श्रद्धा भक्ति से मां दुर्गा रात्रि जागरण, यज्ञ और भंडारा श्रद्धा और भक्ति द्वारा होगा : डॉ. मिश्रा

थानेसर, प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी 29 मार्च : श्री दुर्गा देवी मन्दिर पिपली के पीठाधीश ज्योतिषाचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने जानकारी दी कि मिश्रा परिवार हरसू पांडे महाराज जी से संबंधित है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार लगभग 650 साल पहले हरसू पांडे नाम के एक राजपुरोहित थे। वह राजा शालिवाहन के राजपुरोहित थे।
लगभग 1860 से परदादा स्वर्गीय पंडित सीता राम मिश्रा, दादा स्वर्गीय पंडित जटा शंकर मिश्रा व पूज्यनीय पिता स्वर्गीय पण्डित श्री शेषमणि मिश्रा आगे उनके ज्येष्ठ पुत्र डॉ. मिश्रा श्री दुर्गा देवी मंदिर पिपली के पीठाधीश और कनिष्ठ पुत्र पंडित राहुल मिश्रा श्री दुर्गा देवी मंदिर पिपली के पुजारी के रूप में कार्य कर रहे है।
मिश्रा परिवार वैदिक कर्म कांड, ज्योतिष,
जन्म कुंडली, वास्तु शास्त्र,आध्यात्मिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों को समाज के विकास एवं कल्याण हेतु वाराणसी से सेवा प्रदान कर रहा है।
31 दिसम्बर 1963 को श्री दुर्गा देवी मन्दिर पिपली की स्थापना उनके पूज्यनीय पिता स्वर्गीय पण्डित शेषमणि मिश्रा संस्थापक जी ने समस्त पिपली के श्रद्वालु भक्ति द्वारा करवायी थी।
तभी से नवरात्र में चैत्र और आश्विन मॉस की त्रयोदशी को भगवती जागरण और चौदस नवरात्र को यज्ञ व भंडारा प्रारम्भ हुआ था। सनातन धर्म में भगवान का ध्यान, आरती, संकीर्तन, जीव जंतुओं और गौ सेवा के साथ माता पिता और बुजुर्गों की सेवा का बहुत महत्त्व है।
उसी श्रृंखला में समस्त पिपली निवासियों के सहयोग से भगवती जागरण चैत्र मॉस की त्रयोदशी नवरात्र,
मंगलवार, 31मार्च 2026 को भजन गायक सोमदत्त हुनर एंड पार्टी द्वारा किया जाएगा।
चौदस नवरात्र बुधवार, 1 अप्रैल 2026 को यज्ञ एवं भण्डारा मन्दिर परिसर में होगा I
पण्डित राहुल मिश्रा ने वैदिक मन्त्रों से सभी भक्तों के द्वारा पूजा- अर्चना करवाई I
समस्त विश्व कल्याण हेतु माँ दुर्गा का संकीर्तन, श्री दुर्गा चालीसा पाठ और संकीर्तन सुमित्रा पाहवा, पायल सैनी, निशा अरोड़ा, ऊषा शर्मा, आशा कवात्रा, सरोज शर्मा,शिमला धीमान, भक्त सुशील तलवाड़ और छोटे बच्चो के साथ सभी भक्तों ने श्रद्धा अनुसार किया। मां दुर्गा की आरती के पश्चात सभी भक्तों ने श्रद्धा अनुसार प्रसाद लिया।
ट्वीटर के माध्यम से समर्थगुरू धारा, मुरथल, हरियाणा के संस्थापक आदरणीय समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया ने बताया कि हमारी आत्मा, गोविंद यह हमारा मूल तत्व है। जब हम उससे कट जाते हैं तो फिर हम उदासी में जीते हैं, चिंता में जीने लगते हैं। लेकिन अगर तुम अपने मूल तत्व से जुड़ जाओ, तो ज़िन्दगी फिर से उमंग में जीने लगती है।

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