योग तन, मन और आत्मा की एकात्म अवस्था का परिचायक है–स्वामी विज्ञानानंद

(पंजाब) फिरोजपुर 20 जनवरी {कैलाश शर्मा जिला विशेष संवाददाता}=
“दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान” द्वारा स्थानीय कैथू जेल में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम के आज द्वितीय दिवस अपने स्वास्थ्य जाग्रति कार्यक्रम “आरोग्य” के अंतर्गत आज “विलक्षण योग एवं ध्यान साधना शिविर” का आयोजन किया गया। जिसमें संस्थान की ओर से “श्री आशुतोष महाराज जी” के शिष्य योगाचार्य स्वामी विज्ञानानंद जी ने भारतीय संस्कृति की उत्कृष्ट विरासत “योग” की महानता से परिचित कराते हुए योग साधकों को बताया कि योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है यह तन, मन और आत्मा की एकात्म अवस्था का परिचायक है, मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य है, संयम और पूर्ति प्रदायक तथा स्वास्थ्य और भलाई के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को भी प्रदान करने वाला है। यह मात्र व्यायाम के बारे में ही नहीं है, वरन् अपने भीतर एकता की भावना, दुनिया और प्रकृति की खोज के विषय में है। हमारी परिवर्तनशील जीवन- शैली में यह चेतना बनकर, हमें जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद कर सकता है। इसीलिए गौरवान्वित होकर यह कहा जा सकता है कि सम्पूर्ण विश्व में आर्यावर्त भारतीय योग मनीषियों द्वारा प्रदत्त “योग पद्धति” को उत्कृष्ट निधि के रूप में सर्वसम्मति से समग्र राष्ट्रों द्वारा अग्रगण्य स्वीकार किया गया ।

   वस्तुतः संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा ने दिसम्बर 2014 में प्रतिवर्ष "21 जून" को "अंतरराष्ट्रीय योग दिवस"के रूप में मनाने का संकल्प पारित किया।  

“योग” की रहस्यात्मक विवेचना पर प्रकाश डालते हुए स्वामी जी ने बताया कि आज मूलतः कुछ योगासनों और प्राणायामों को ही है। सम्पूर्ण योग पद्धति स्वीकार कर लिया जाता है। जब कि ऐसा नहीं है। “योग” शब्द संस्कृत की “युज्” धातु से बना है। जिसका अर्थ होता है “जुड़ना”। अर्थात् हमारे तन, मन और आत्मा की एकात्म अवस्था ही योग है। “महर्षि पातंजलि” ने “योग” की परिभाषा देते हुए कहा है कि “योगः चित्त वृत्ति निरोधः”अर्थात् चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है। फिर ही “योगः कर्मसु कौशलम्”की अवधारणा सिद्ध होती है।

   स्वामी जी ने पातंजलि "योग सूत्र" के अनुसार कैदी बंधुओं को ताड़ासन, दण्डासन, कटिचक्रासन, अर्द्ध चंद्रासन, द्विचक्रिकासन, भुजंगासन, नाड़ीशोधन, अनुलोम विलोम प्राणायाम इत्यादि का विधिवत् अभ्यास करवाते हुए इनके वैज्ञानिक पक्ष द्वारा दैहिक लाभों से परिचित भी करवाया।                                                                                                                                     

     भारतीय संस्कृति की मर्यादा बनाये रखते हुए कार्यक्रम का आरम्भ विधिवत् मंत्रोच्चारण और ज्योति प्रज्वलन के साथ हुआ। सभी कैदी बंधुओं ने दैहिक आरोग्यता से परिपूर्ण कार्यक्रम का पूर्णतः लाभ प्राप्त किया।

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