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संवाददाता – उमेश कुमार
पिपली, 5 सितंबर : श्री दुर्गा देवी मन्दिर, पिपली, कुरुक्षेत्र के पीठाधीश ज्योतिषाचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा के निर्देशन में शास्त्रों और पुराणों अनुसार भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया।
भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लिया था I भगवान श्री कृष्ण समान कर्म योगी बनना और दिव्य गुणों को जीवन में लाना ही सच्ची जन्माष्टमी है I
ट्विटर के माध्यम से आदरणीय समर्थगुरू सिद्धार्थ औलिया जी ने विशेष बताया कि ध्यान जागरूकता अथवा निर्विकल्प चेतना का मार्ग है। ध्यान का अर्थ है- मन के पार जाकर उस गहन मौन में प्रवेश करना, जहाँ कोई भी विक्षोभ नहीं रहता, जहाँ केवल शून्यता का अनुभव होता है। ध्यान का सार है- निर्विकल्प जागरूकता की अवस्था में जीना।
श्री दुर्गा देवी मन्दिर ,पिपली के पुजारी पंडित राहुल मिश्रा ने वैदिक मंत्रों से पूजा अर्चना करवाई। सायं 6.30 बजे माँ दुर्गा की विशेष आरती हुई । सायं 7 बजे दही हांडी उत्सव मनाया गया व रात्रि 9 बजे संकीर्तन शुरू हुआ।
समस्त विश्व कल्याण हेतु श्री दुर्गा चालीसा पाठ और भगवान श्रीकृष्ण और मां दुर्गा संकीर्तन सुमित्रा पाहवा, निशा अरोड़ा, ऊषा शर्मा,आशा कवात्रा, सरोज शर्मा, शिमला धीमान, सुरेन्द्र कौर, भक्त सुशील तलवाड़ और छोटे बच्चो के साथ सभी भक्तों ने श्रद्धा भक्ति अनुसार किया।
श्री दुर्गा देवी मन्दिर ,पिपली, कुरुक्षेत्र के पीठाधीश डॉ.सुरेश मिश्रा ने भारतीय पत्रकार कल्याण मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन आश्री और उनकी बेटी प्रकृति आश्री को मां दुर्गा की लाल चुनरी और समर्थगुरु धाम की पुस्तक ओशो गीता और समर्थगुरु की जीवन यात्रा से सम्मानित किया।
रात्रि बारह बजे भोग लगाकर पूजन व भगवान श्रीकृष्ण जी की आरती श्रद्धा भक्ति भावना से हुई। सभी भक्तों ने प्रसाद श्रद्धा भक्ति से लिया।


