
पर्यटन विकास कार्यों से जनपद बदायूं को मिलेगी नई पहचान13 मई 2026 कृष्ण हरि शर्मा जिला संवाददाता बीबी न्यूज़ बदायूं
पर्यटन विकास के 565.62 लाख रूपए के कार्यों का लोकार्पण, 2081.50 लाख रूपए के कार्यों का शिलान्यास किया जाएगा
बदायूं 13 मई। पर्यटन विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा जनपद बदायूं में विभिन्न धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के विकास एवं सौंदर्यीकरण कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम मा0 मंत्री पर्यटन एवं संस्कृति उ0प्र0 सरकार जयवीर सिंह व मा0 केन्द्रीय राज्य मंत्री बी0एल0 वर्मा द्वारा गुरूवार को किया जाएगा। कार्यक्रम में 565.62 लाख रूपए के पर्यटन विकास कार्यों का लोकार्पण तथा कछला गंगा घाट के 1792.18 लाख रूपए के शिलान्यास के कार्यों सहित कुल 2081.50 लाख रूपए के पर्यटन विकास कार्यों का शिलान्यास किया जाएगा। कार्यक्रम में मा0 जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी व आमजन व श्रद्धालु मौजूद रहंेंगे।
कार्यक्रम में वित्तीय वर्ष 2023-24 के अंतर्गत गंगा देवी मईया मंदिर पर्यटन विकास कार्य का लोकार्पण, जिसकी लागत 98.27 लाख रुपये है। इसके अतिरिक्त दुर्गा देवी भवन मंदिर पर्यटन विकास कार्य का लोकार्पण, जिसकी लागत 110.42 लाख रुपये है तथा परी माता मंदिर का सौंदर्यीकरण कार्य का लोकार्पण, जिस पर लगभग 92.14 लाख रुपये की लागत आई है, कराया जाएगां।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत पौराणिक तीर्थ स्थल सहस्रबाहू का पर्यटन विकास कार्य का लोकार्पण, जिसकी लागत 74.45 लाख रुपये है। तपोसिद्ध बाबा की मढ़ी का प्राचीन शिव मंदिर का पर्यटन विकास कार्य का लोकार्पण, जिसकी लागत 75.31 लाख रुपये है। श्री रामचन्द्र विराजमान मंदिर का पर्यटन विकास कार्य जिसकी लागत 115.03 लाख रूपए है, का लोकार्पण किया जाएगा।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत श्री बाबा देवादास मंदिर (अस्तल) का पर्यटन विकास कार्य जिसकी लागत 71.53 लाख रूपए है, का शिलान्यास किया जाएगा तथा प्राचीन मंदिर बहादुर सिंह हनुमान बाबा आश्रम का पर्यटन विकास कार्य जिसकी लागत 107.69 लाख रूपए है, का शिलान्यास किया जाएगा। माता मलाई देवी मंदिर का सौन्दर्यीकरण एवं पर्यटन विकास का कार्य जिसकी लागत 110.10 लाख रूपए है, का शिलान्यास किया जाएगा।
साथ ही वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत कछला गंगा घाट (पार्ट-ए) पर्यटन विकास कार्य, जिसकी लागत 1792.18 लाख रुपये है, का शिलान्यास किया जाएगा। इन परियोजनाओं से जनपद बदायूं में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलेगी तथा स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। पर्यटन स्थलों पर आधारभूत सुविधाओं के विकास से बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।


