बांसुरी का इतिहास 45000 वर्ष पूर्व का, परंतु समाज में प्रचलन योगेश्वर भगवान कृष्ण से : डॉ. नरेंद्र सिंह

बांसुरी वादन सीखने के लिए प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए कठिन परिश्रम हेतु आवाह्न किया
डॉ. रणपाल सिंह।

कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक/अमित 21 मई : गीता मनीषी परमपूज्य स्वामी ज्ञानानंद जी की प्रेरणा से तथा हरियाणा कला परिषद् एवं जीओ गीता गुरुकुल के सहयोग से आज बांसुरी वादन कार्यशाला के 11 वें दिन डा. रणपाल सिंह, पूर्व कुलपति चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद मुख्य अतिथि के रूप में तथा डॉ नरेंद्र सिंह जी जिला जन संपर्क अधिकारी, कुरुक्षेत्र विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे । भगवद्गीता के समक्ष दीपक जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया । प्रशिक्षुओं ने मुख्य अतिथि के समक्ष बांसुरी पर कुछ सरगमों का अभ्यास, राष्ट्र गान प्रस्तुति कर के अब तक की हुई कार्यशाला की प्रगति से अवगत कराया। गीता ज्ञान संस्थानम के शिक्षा प्रमुख डॉ. वी के कोहली तथा कार्यशाला संयोजक डॉ. सचिंद्र कुमार द्वारा संस्थान की गतिविधियों का संक्षेप में विवरण दिया गया। इसके उपरांत विशिष्ट अतिथि डॉ. नरेंद्र सिंह ने अपने उद्बोधन में सभी प्रतिभागियों की प्रशंसा करते हुए सभी को बधाई दी एवं उनके भविष्य में सफलता की कामना करते हुए प्रतिभागियों को बांसुरी के इतिहास के बारे में अवगत कराया । हरियाणा कला परिषद् का विशेष धन्यवाद ज्ञापित करते हुए उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार कलाओं को बढ़ावा देने के लिए विशेष उपक्रम करती रहती है। मुख्य अतिथि डॉ. रणपाल सिंह ने संस्थान में में चल रहे विभिन्न आयोजनों एवं बांसुरी कार्यशाला की उपयोगिता पर अपने विचार रखते हुए संस्थान को शुभकामनाएं अभिव्यक्त की। इसके उपरांत कार्यशाला के संचालक एवं प्रशिक्षक डॉ. मनीश कुकरेजा, कार्यशाला संयोजक डॉ. सचिंद्र कुमार, पुस्तकालय अध्यक्ष वेद मिश्रा, सहप्रशिक्षक पवन गुंबर व सहयोगी प्रशिक्षक देवेंद्र, ने मुख्य अतिथि जी को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इससे पूर्व 10 वें दिन संगीत विभाग के प्रसिद्ध तबला वादक अभिषेक ने तीन ताल की जानकारी दी व अभ्यास कराया तथा विस्तार से लय, विभाग, मात्रा, खाली, ताली, सम, आवर्तन आदि की जानकारी दी। अतिथि कार्यशाला में उपस्थित विभिन्न विद्यालयों से आए विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों से भी मिले एवं उनके अनुभव साझा किए। सभी प्रतिभागियों एवं उनके अभिभावकों ने अपनी फीड बैक देते हुए कहा कि बांसुरी वादन कार्यशाला के ग्यारहवें दिन संपूर्ण राष्ट्र गान बजाने से उनका बांसुरी वादन के प्रति आत्मविश्वास जागृत हुआ है। इस पवित्र वातावरण में उन्हें भगवान कृष्ण की अराधना बांसुरी के माध्यम से करने की दिव्य अनुभूति हो रही है तथा आग्रह किया कि इस प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन प्रत्येक विद्यालय में किया जाना चाहिए। ऐसा क्रियान्वित होने से अधिकाधिक संगीत में रुचि रखने वाले विद्यार्थी लाभान्वित हो पाएंगे। कार्यशाला का समापन शांति पाठ से किया गया। डॉ कुकरेजा ने आगामी जानकारी देते हुए बताया कि आगामी शनिवार 21 मई 2026 को उनके बांसुरी के गुरु एवं प्रेरणा स्त्रोत उस्ताद डॉ मुजतबा हुसैन जी पटियाला से विशेष रूप से आयेंगे व दोपहर 3 से 5 बजे तक सभी प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करेंगे ।

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