
पिहोवा,प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी 22 मई : शिवपुरी रोड स्थित श्री गोबिदानंद आश्रम में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के पांचवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ कथा का रसपान किया तथा भजनों पर झूमकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। व्यासपीठ से कथावाचक महंत सर्वेश्वरी गिरी ने राजा परीक्षित के दिग्विजय प्रसंग में बताया कि उन्होंने पूरे राज्य में धर्म की स्थापना और अधर्म के नाश के लिए भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने कलियुग को दंड देना चाहा, लेकिन शरण मांगने पर उसे कुछ स्थानों पर रहने की अनुमति दी।
उन्होंने ऋषि श्रृंगी के शाप प्रसंग में बताया कि ऋषि शमीक के अपमान से क्रोधित होकर ऋषि श्रृंगी ने राजा परीक्षित को सातवें दिन तक्षक नाग के डंसने का शाप दे दिया।
सुखदेव जी के व्यास गद्दी पर विराजमान होने के बारे में उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित ने मोक्ष प्राप्ति के लिए गंगा तट पर संतों की सभा की। वहां श्री सुखदेव जी ने व्यास गद्दी पर विराजमान होकर उन्हें श्रीमद्भागवत कथा सुनाई।
महिला संकीर्तन मंडल द्वारा भजन-कीर्तन प्रस्तुत किए गए, जिन पर श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर झूम उठे। कथा स्थल भगवान के जयकारों और भजनों से गुंजायमान रहा।
कथा के अंत में आरती कर श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।


