
दीपक शर्मा (जिला संवाददाता )
बरेली : मृत्यु जीवन का अंत हो सकती है, लेकिन नेत्रदान किसी और के जीवन में एक नई शुरुआत बन सकता है।
विश्व नेत्रदान दिवस के अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विश्राम सिंह जी के मार्गदर्शन में यूपीएचसी सी.बी.गंज में नेत्रदान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस अवसर पर डॉ. मधु गुप्ता द्वारा स्वास्थ्यकर्मियों एवं उनके परिजनों को नेत्रदान के महत्व, इसकी सरल प्रक्रिया तथा समाज में इसके सकारात्मक प्रभाव के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान कई लोगों ने नेत्रदान का संकल्प लेकर इस महादान से जुड़ने की इच्छा व्यक्त की।
जागरूकता वार्ता के दौरान डॉ. मधु गुप्ता ने अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि दिसंबर 2025 में उनके पूज्य पिताजी के निधन के उपरांत उनके नेत्रों का दान किया गया। इस भावनात्मक और संवेदनशील प्रक्रिया को उनकी प्रिय मित्र एवं वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नीलिमा मेहरोत्रा (SRMS) ने सफलतापूर्वक सम्पन्न कराया। संयोगवश, डॉ. नीलिमा ने ही पहले उनके पिताजी की मोतियाबिंद सर्जरी भी की थी। एक बेटी और एक चिकित्सक के रूप में यह क्षण अत्यंत भावुक था, लेकिन यह जानकर गहरा संतोष मिला कि उनके पिताजी के कॉर्निया ने दो व्यक्तियों के जीवन में पुनः प्रकाश भर दिया और उन्हें दुनिया देखने का अमूल्य अवसर मिला।
डॉ. मधु गुप्ता ने कहा कि नेत्रदान ऐसा महादान है जो मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा का अवसर देता है। हमारी एक सकारात्मक सोच किसी के अंधकारमय जीवन को रोशनी से भर सकती है।
समाज के नाम संदेश—
जब हम इस दुनिया से विदा हों, तब भी हमारी आंखें किसी के सपनों को देखने में मदद कर सकती हैं। नेत्रदान केवल एक दान नहीं, बल्कि आशा, संवेदना और मानवता की अमर विरासत है। आइए, हम सभी नेत्रदान का संकल्प लें और किसी की दुनिया रोशन करने का माध्यम बनें।


