
थानेसर, संजीव कुमारी 16 जून : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के विश्व शांति धाम सेवा केंद्र, कुरुक्षेत्र में आयोजित प्रातः मुरली क्लास में सेंटर इंचार्ज राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज बहन जी ने सभी बी के भाई- बहनों को परमात्मा के महावाक्य सुनाते हुए कहा कि वर्तमान समय में मनुष्यों को देह- अभिमान छोड़कर आत्म- अभिमानी बनने का विशेष पुरुषार्थ करना चाहिए। सच्चे राजयोगी वही हैं जो एक परमात्मा पिता की याद में रहकर पवित्रता को धारण करते हैं और माया रूपी रावण की दलदल से स्वयं को मुक्त करते हैं।
उन्होंने बताया कि परमात्मा शिव बाबा स्वयं आकर मनुष्य आत्माओं को सही राह दिखाते हैं तथा सुखधाम और शान्तिधाम की प्राप्ति का मार्ग बताते हैं। परमात्मा की याद से विकर्मों का विनाश होता है और आत्मा पुनः अपने मूल पवित्र स्वरूप को प्राप्त कर लेती है। इसलिए जीवन में “मैं आत्मा हूँ” का अभ्यास बढ़ाना और “मेरा-तेरा” के भाव को समाप्त करना आवश्यक है।
सरोज बहन जी ने कहा कि संसार के भौतिक आकर्षण, इच्छाएँ और आसक्तियाँ ही माया की दलदल हैं। जो स्वयं इन बंधनों से मुक्त होता है, वही अन्य मनुष्यों को भी सही दिशा दिखाने में सक्षम बनता है। हमें इच्छा मात्रम् अविद्या की स्थिति बनाकर सरलता, सहनशीलता और पवित्रता को जीवन में धारण करना चाहिए।
इस अवसर पर उन्होंने परमात्मा के दिए वरदान का स्मरण कराते हुए कहा कि विश्व कल्याणकारी बनने के लिए ईश्वरीय रूहाब और रहम, दोनों गुणों को समान रूप से जीवन में धारण करना आवश्यक है। इन्हीं गुणों के आधार पर हम विश्व नव-निर्माण के निमित्त बन सकते हैं।
इस अवसर पर बीके राधा, बीके पुष्पा, बीके लता, बीके प्रियंका, बीके नेहा, बीके सिमरन, बीके आरती, बीके भारती, बीके संतोष और अनेक बी के बहन -भाई उपस्थित रहे।


