लेही, ड्रम सीडर और छिटकवा पद्धति से करें धान की बुवाई


बलरामपुर, 08 जुलाई 2026/ खरीफ सीजन के दृष्टिगत कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि खेतों में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने पर नर्सरी तैयार होने की स्थिति में रोपाई करें अथवा अंकुरित बीजों की लेही विधि, ड्रम सीडर अथवा छिटकवा विधि से धान की बुवाई करें। बुवाई एवं रोपाई से पहले बीजों का कवकनाशी (कार्बेन्डाजिम) एवं जैव उर्वरकों से उपचार करने की भी सलाह दी गई है।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार हरेली तिहार तक खरीफ फसलों की बुआई एवं रोपाई की जा सकती है। जमीन में बतर की स्थिति में 15 जुलाई तक धान की बुवाई कर लें। रोपाई या बियासी पद्धति से धान की खेती करने वाले किसान 30 जुलाई तक रोपाई या बियासी का कार्य कर लें। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया है कि रासायनिक उर्वरकों के साथ हरी खाद एवं नील-हरित शैवाल के उपयोग से एक एकड़ में एक बोरी यूरिया के बराबर नाइट्रोजन प्राप्त होती है तथा मिट्टी की संरचना में सुधार होता है, इसलिए नील हरित शैवाल का उपयोग अवश्य करें।
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि जिन खेतों में अधिक जलभराव है तथा लगातार वर्षा हो रही है, वहां लेही पद्धति से धान की बुवाई करना सबसे उपयुक्त रहेगा। एक एकड़ में सीधी बुवाई एवं बियासी के लिए लगभग 30 किलोग्राम, रोपा पद्धति के लिए 20 किलोग्राम तथा हाइब्रिड किस्मों के लिए 6 किलोग्राम बीज का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
वैज्ञानिकों ने किसानों को जल्द एवं मध्यम अवधि में पकने वाली धान की प्रजातियां अपनाने की सलाह दी है। इनमें इंद्रावती, बस्तर धान, छत्तीसगढ़ बरसानी धान, इंदिरा एरोबिक धान, एमटीयू-1010, एमटीयू-1156, विक्रम टीसीआर, छत्तीसगढ़ धान-979 तथा महामाया प्रमुख हैं। समय पर इन प्रजातियों की बुवाई से बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
किसानों को फसल बोने के बाद शुरुआती 40 दिनों तक खेत को खरपतवार मुक्त रखने की सलाह दी गई है।


