मोर गांव मोर पानी अभियान से मजबूत हो रही जल सुरक्षा
2500 कंटूर ट्रेंच निर्माण पूर्ण कर सहेजी जा रही वर्षा जल


बलरामपुर, 08 जुलाई 2026/ कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन में जिले में जल संरक्षण की दिशा में लगातार प्रभावी कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में मोर गांव मोर पानी अभियान 2.0 के अंतर्गत जिले में वर्षा जल की प्रत्येक बूंद को संरक्षित कर भू-जल स्तर में वृद्धि, जल स्रोतों के पुनर्जीवन तथा पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से वृहद स्तर पर कंटूर ट्रेंच निर्माण कराया जा रहा है। जिससे आने वाले समय में जिले की जल सुरक्षा को मजबूत बनाने के साथ-साथ कृषि और ग्रामीण आजीविका को भी नई मजबूती मिलेगी।
जिले में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए पहाड़ी एवं ढलान वाले क्षेत्रों में वैज्ञानिक पद्धति से कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया जा रहा है। जिसमें विकासखण्ड शंकरगढ़, कुसमी, राजपुर, रामचन्द्रपुर शामिल हैं। जहां कंटूर ट्रेंच के माध्यम से वर्षा का पानी बहकर नष्ट होने के बजाय भूमि में समाहित हो रहा है, जिससे भू-जल का पुनर्भरण तेजी से हो रहा है। इसके साथ ही मिट्टी के कटाव पर नयंत्रण हो रहा है और खेतों की उर्वरता भी संरक्षित हो रही है।
अभियान के तहत अब तक जिले में 2,500 कंटूर ट्रेंच का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। इन संरचनाओं के माध्यम से लगभग 40.08 लाख लीटर वर्षा जल का संचयन एवं भू-गर्भ में अवशोषण सुनिश्चित हुआ है। वर्षा जल के संरक्षण से आसपास के क्षेत्रों में कुओं, बोरवेल तथा अन्य जल स्रोतों के जलस्तर में वृद्धि होने की संभावना बढ़ी है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल एवं सिंचाई की उपलब्धता को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
जिले में रिज टू वैली वाटरशेड अवधारणा के अनुरूप कुल 10 कार्यों के अंतर्गत 5,124 कंटूर ट्रेंच का निर्माण कराया जा रहा है। इस तकनीक में पहाड़ियों एवं ऊंचाई वाले क्षेत्रों से तेज गति से बहने वाले वर्षा जल को छोटे-छोटे ट्रेंचों में रोककर भूमि के भीतर समाहित किया जाता है। इससे न केवल बहुमूल्य वर्षा जल का संरक्षण होता है, बल्कि मिट्टी का कटाव रुकता है, निचले क्षेत्रों के खेतों में लंबे समय तक नमी बनी रहती है तथा फसलों को प्राकृतिक रूप से आवश्यक जल उपलब्ध होता है।
कंटूर ट्रेंच निर्माण, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भू-जल स्तर में सुधार होने से गर्मी के मौसम में जल संकट की स्थिति कम होगी, किसानों को सिंचाई के लिए बेहतर जल उपलब्धता मिलेगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों का पुनर्जीवन संभव होगा। इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने, हरित आवरण को सुदृढ़ करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में भी सहायता मिलेगी।


