
कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 9 जुलाई : श्री दुर्गा देवी मंदिर पिपली, कुरुक्षेत्र के पीठाधीश और समर्थगुरु धारा हिमाचल के ज़ोनल कोऑर्डिनेटर
आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि समर्थगुरु धाम, मुरथल, हरियाणा के संस्थापक समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया के सान्निध्य में प्रेम याेग कार्यक्रम के फीडबैक सेशन में ईश्वरीय श्रद्धा भक्ति और प्रेम पूर्ण उत्सव मनाया गया।
संपूर्ण भारत से आये प्रतिभागियों ने अहोभाव प्रकट किया। भक्ति और कृतज्ञता के साथ भगवान की दिव्य ऊर्जा और समर्थगुरु की अनंत कृपा के साथ प्रेम का अनुभव किया।
शिकायत से अहोभाव की यात्रा का नाम आध्यात्मिकता है।
समर्थगुरु धाम में सहज योग का एक अनूठा संयोजन है जिसके ये मुख्य कार्यक्रम निम्नलिखित है : ए. ज्ञान योग 14 कार्यक्रम बी. भक्ति योग 14 कार्यक्रम सी. हठ योग 16 कार्यक्रम डी. कर्म योग 23 कार्यक्रम सभी को समर्थगुरु द्वारा वैज्ञानिकता और आध्यात्मिकता के आधार पर बहुत सुंदर डिज़ाइन किया गया है ।
समर्थगुरू धाम, मुरथल, हरियाणा में गुरु-शिष्य परम्परा से जुड़कर अपने जीवन को संवारने के लिए रविवार,12 जुलाई 2026 को एकदिवसीय स्प्रिचुअल रिट्रीट प्रोग्राम होगा और
13 जुलाई से 15 जुलाई 2026 को सिद्धार्थ ध्यान योग हो रहा है जिसमें महात्मा बुद्ध की विपस्सना , परमगुरु ओशो और समर्थगुरु की प्रभावशाली ध्यान विधियां, गुरु गोरखनाथ एवं संत कबीर का अजपा, गुरुनानक देव का एक ओंकार सतनाम और महर्षि पतंजलि की समाधि के साथ सांस सांस सुमिरन की कला दी जाएगी । सच्चे जिज्ञासु अपनी बुकिंग इस मोबाईल नम्बर और वेबसाइट पर करवा सकते है।
ट्विटर के माध्यम से आदरणीय समर्थगुरू सिद्धार्थ औलिया जी ने विशेष बताया कि अगर है स्वर्ग धरती पर कहीं पर यहीं पर है यहीं पर है यहीं पर।
याद रखना बिना कर्म के मुक्त नहीं हो सकते हो। पहले कर्म तुमने सकाम किया,फल की प्राप्ति के लिए किया। अब केवल कर्म करने का मजा लेने के लिए कर्म कर रहे हो। तब तुम मुक्ति, निर्वाण को प्राप्त कर लेते हो; अर्थात् सानंद कर्म मुक्ति देता है और सकाम कर्म बंधन देता है।


