
लोकेशन रायबरेलीरिपोर्टर विपिन राजपूत
देश भर में चलाये गए संतुलित उर्वरक प्रयोग अभियान के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र दरियापुर रायबरेली के द्वारा दिनांक 23 अप्रैल से 30 मई 2026 तक जनपद के
विभिन्न ग्रामों में अभियान चलाया गया । उक्त के क्रम में माननीय कृषि मंत्री भारत सरकार श्री शिवराज सिंह चौहान के दिए गए निर्देशों के क्रम में दिनांक 1 जून से 30 जून तक खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत आज दिनांक 1 जून 2026 को कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में कृषकों को उपरोक्त विषय पर जागरूक किया गया ।
कार्यक्रम में भारतीय गन्ना अनुसंधान लखनऊ के प्रधान वैज्ञानिक डॉक्टर अरुण कुमार बैठा, डॉक्टर हिमांशु शेखर पांडे कृषि विज्ञान केंद्र दरियापुर के अध्यक्ष डॉक्टर केके सिंह, शस्य वैज्ञानिक डॉक्टर आरके कनौजिया, उद्यान वैज्ञानिक डॉक्टर शैलेंद्र विक्रम सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र पलटी खेड़ा, सरेनी के शस्य वैज्ञानिक डॉक्टर सुधांशु वर्मा एवं डॉक्टर विश्व विजय रघुवंशी ने कृषकों को विभिन्न प्रकार की तकनीकी जानकारी प्रदान की ।
कार्यक्रम के प्रारंभ में केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर आरके कनौजिया ने आए हुए किसान भाइयों का स्वागत करते हुए खेत बचाओ अभियान के महत्व पर प्रकाश डाला एवं उन्होंने बताया की किस तरह से हम अपने खेतों में रासायनिक एवं जैविक खादों का संतुलित प्रयोग करते हुए अपने खेत की उर्वरा शक्ति को संजोये रख सकते हैं साथ ही साथ रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर सकते हैं साथ ही साथ फसलों के उत्पादन की लागत में कमी ला सकते हैं ।
भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉक्टर अरुण बैठा ने किसान भाइयों को फसलों में संतुलित उर्वरक प्रबंधन के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी देते हुए आगामी खरीफ फसलों में फसल सुरक्षा के दृष्टिकोण अधिक से अधिक जैव उत्पादों का प्रयोग करने की सलाह दी, उन्होंने ट्राइकोडर्मा विरडी, विवेरिया बैसियाना, नीम के द्वारा निर्मित कीटनाशी के अधिक से अधिक प्रयोग की सलाह दी । संस्थान के वैज्ञानिक डॉक्टर हिमांशु पांडे ने किसानों को अधिक से अधिक गन्ने की खेती से जुड़ने की सलाह दी साथ ही उन्होंने गन्ना संस्थान द्वारा कृषकों की समस्याओं के निदान के लिए तैयार की गई नवीनतम मशीनरी के बारे में जानकारी दी जो की बुवाई से लेकर खेत में गुड़ाई एवं गन्ने की कटाई में काम आती हैं के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी।
केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉक्टर के के सिंह ने कृषकों को मृदा की जांच के आधार पर उर्वरकों के प्रयोग की सलाह दी साथ ही उन्होंने इस समय हरी खाद के रूप में ढैंचा की बुवाई के लिए सलाह दिया उन्होंने बताया कि अगर अभी भी किसान भाई ढैंचा की बुवाई करते हैं और 30-35 दिनों में उसकी पलटाई कर धान की रोपाई करते हैं तो धान की फसल में प्रयोग की जाने वाली डीएपी की मात्रा में काफी कमी लाई जा सकती है इस तरह से खेत की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी और रासायनिक खादों के प्रयोग में कमी भी आएगी इसके साथ ही उन्होंने जैविक खादों के अधिक से अधिक प्रयोग की सलाह दी ।
केंद्र के उद्यान वैज्ञानिक डॉक्टर एस वी सिंह ने किसान भाइयों को वर्तमान में औद्यानिक फसलों में कीट एवं रोग प्रबंधन पर विस्तार पूर्वक जानकारी दी साथ ही उन्होंने किसान भाइयों से अनुरोध किया कि अगर वह खरीफ में प्याज लगते हैं तो उसे वह अच्छा मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं इसके साथ ही साथ उन्होंने किसान भाइयों को अपने फसल चक्र में अधिक से अधिक औद्यानिक फसलों की खेती की सलाह दी ।
कृषि विज्ञान केंद्र पलटी खेड़ा, सरेनी के वैज्ञानिक डॉक्टर सुधांशु वर्मा ने किसान भाइयों को केंचुआ पालन की सलाह दी जिसके द्वारा वह वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन कर अपने खेतों में इसका प्रयोग करके खेत की उर्वरा शक्ति को सुधार सकते हैं साथ ही साथ उन्होंने जैव उर्वरकों के प्रयोग की भी सलाह दी । वैज्ञानिक फसल सुरक्षा डॉक्टर विश्व विजय रघुवंशी ने किसान भाइयों को बताया कि जनपद में यह महसूस किया गया की फसल सुरक्षा के दौरान किसान भाई संस्तुत मात्रा से कहीं ज्यादा कीट रक्षा रसायनों का प्रयोग करते हैं जिससे उनकी खेती की लागत भी बढ़ती है और साथ ही साथ भूमि एवं वातावरण पर इसका दुष्प्रभाव भी पड़ता है इसलिए उन्होंने सलाह दी की फसल सुरक्षा के लिए संस्तुत मात्रा में ही रसायनों का प्रयोग करें और आवश्यकता पड़ने पर उनसे फोन के द्वारा भी संपर्क कर सही दावाओं की जानकारी प्राप्त कर फसलों पर डालें
कार्यक्रम का संचालन केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर आरके कनौजिया ने किया उन्होंने आए हुए किसान भाइयों एवं भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों का आभार प्रकट किया । उक्त कार्यक्रम में 54 किसान भाइयों ने प्रतिभाग किया और कार्यक्रम के दौरान प्रश्न पूछे जिनका समाधान वैज्ञानिकों की टीम के द्वारा किया गया ।


