
सेंट्रल डेस्क संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक।
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वृन्दावन,21 जुलाई : छटीकरा रोड़ स्थित मृदुल वृन्दावन धाम में द भागवत मिशन फाउंडेशन के द्वारा नव-दिवसीय श्रीगुरू पूर्णिमा महोत्सव एवं पूज्य सद्गुरुदेव जन्मोत्सव अत्यन्त श्रद्धा एवं धूमधाम के साथ प्रारम्भ हो गया है।महोत्सव का शुभारंभ श्रीहरिदासी वैष्णव संप्रदायाचार्य विश्वविख्यात भागवताचार्य आचार्य मृदुल कृष्ण गोस्वामी महाराज, श्रीमज्जगद्गुरू श्रीनाभापीठाधीश्वर स्वामी सुतीक्ष्णदास देवाचार्य महाराज एवं आचार्य कुटी पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी श्रीरामप्रपन्नाचार्य महाराज आदि ने वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य ठाकुर श्रीबांकेबिहारी महाराज के चित्रपट के समक्ष वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य दीप प्रज्ज्वलित करके किया। इससे पूर्व श्रीमद्भागवतजी की भव्य कलश यात्रा निकाली गई। जिसमें पीत वस्त्र पहने सैकड़ों महिलाएं सिर पर मंगल कलश धारण किए साथ चल रही थीं।साथ ही असंख्य भक्त- श्रद्धालु श्रीहरिनाम संकीर्तन करते हुए शामिल हुए।
तत्पश्चात व्यासपीठ पर आसीन श्रीहरिदासी वैष्णव संप्रदायाचार्य विश्वविख्यात भागवताचार्य आचार्य मृदुल कृष्ण गोस्वामी महाराज ने देश-विदेश से आए समस्त भक्तों-श्रृद्धालुओं को श्रीमद्भागवत के महात्म्य की कथा श्रवण कराई।
श्रद्धेय मृदुल कृष्ण गोस्वामी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण के महात्म्य में भक्ति, ज्ञान तथा वैराग्य की महानता को दर्शाया है। भगवान विष्णु की समस्त लीलाओं और अवतारों की कथाओं का ज्ञान कराने वाला यह ग्रंथ सकाम कर्म, निष्काम कर्म, ज्ञान साधना, सिद्धि साधना, भक्ति, अनुग्रह, मर्यादा, द्वैत-अद्वैत, निर्गुण- सगुण का ज्ञान प्रदान करता है। वस्तुत: श्रीमद्भागवत महापुराण भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अक्षय भंडार है। इसीलिए इस ग्रंथ के श्रवण करने से मनुष्य के समस्त पापों का क्षय हो जाता है और भगवान की भक्ति सहज में ही प्राप्त होती है।
व्यासपीठाधीन आचार्य मृदुल कृष्ण गोस्वामी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा श्रवण करने से बुद्धि शुद्ध होती है, संशय दूर होता है, और हमारे मन को शांति मिलती है। यह कथा आत्मा को सांसारिक बंधनों से मुक्त करके ईश्वर के चरणों में स्थापित करती है।इसीलिए इसे मोक्ष का साधन भी कहा जाता है। यह कथा अखिल कोटि ब्रह्माण्ड नायक परब्रह्म परमेश्वर भगवान कृष्ण के जीवन, लीलाओं और भक्ति के विभिन्न पहलुओं को उजागर करती हैं,साथ ही श्रोताओं को आध्यात्मिक ज्ञान और प्रेरणा प्रदान करती हैं।
महोत्सव में प्रख्यात साहित्यकार “यूपी रत्न” डॉ. गोपाल चतुर्वेदी, प्रमुख समाजसेवी दासबिहारी अग्रवाल, आचार्य किशोर कुमार शर्मा, डॉ. राधाकांत शर्मा आदि के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


