
कुरुक्षेत्र का सबसे बड़ा जन्माष्टमी महोत्सव। इस्कॉन ने मुख्यमंत्री को दी जन्माष्टमी पर्व की बधाई।
25,000 से अधिक लोगों में बंटा भगवत् प्रसाद।
कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 5 सितंबर : ज्योतिसर : पेहवा मार्ग स्थित इस्कॉन श्रीकृष्ण अर्जुन मंदिर में सोमवार रात्रि जन्माष्टमी महोत्सव अत्यंत भव्य एवं दिव्य रूप से सम्पन्न हुआ। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा और देर रात तक “हरे कृष्ण” महामंत्र के मधुर संकीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। अध्यक्ष साक्षी गोपाल प्रभुजी ने मधुर कीर्तन और आशीर्वचन देते हुए सभी श्रद्धालुओं को जन्माष्टमी की शुभकामनाए दी। थानेसर विधायक अशोक अरोड़ा ने भगवान की आरती की।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को दी जन्माष्टमी की शुभकामनाएं।
इस्कॉन कुरुक्षेत्र के उपाध्यक्ष मोहन गौरचंद्र प्रभुजी ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से भेंट कर उन्हें श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर प्रभुजी ने मुख्यमंत्री को इस्कॉन का पवित्र पटका पहनाकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुभकामनाएं स्वीकार करते हुए आत्मीय आदर-सत्कार प्रदान किया तथा भगवान श्रीकृष्ण की पावन कर्मभूमि ज्योतिसर तीर्थ में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की।
अनेक विशिष्ट अतिथियों ने लिया भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद।
जन्माष्टमी महोत्सव में विभिन्न क्षेत्रों की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने सहभागिता कर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर साहिल सुधा, कुरुक्षेत्र के उपायुक्त श्विश्राम कुमार मीणा, पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन, पूर्व NHPC डॉयरेक्टर अमित कांसल, न्यायाधीश डी.के. मित्तल, भाजपा जिला अध्यक्ष रमेश सैनी, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार वीरेंद्र पाल सहित प्रशासनिक, शैक्षणिक, सामाजिक एवं धार्मिक क्षेत्र की अनेक गणमान्य हस्तियां इस्कॉन श्री कृष्ण अर्जुन मंदिर पहुंचीं। अतिथियों ने जन्माष्टमी महोत्सव की भव्य व्यवस्थाओं, भक्तिमय वातावरण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना करते हुए आयोजन समिति को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में प्रदेश एवं समाज की सुख-समृद्धि की प्रार्थना भी की।
भक्तिभाव और मध्यरात्रि महाअभिषेक।
संध्या से ही मंदिर में भक्ति गीतों और हरिनाम संकीर्तन का शुभारंभ हो गया था। हजारों दीपों और रंग-बिरंगी रोशनियों से सजे मंदिर परिसर में श्रद्धालु देर रात तक डटे रहे। जैसे ही मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का समय आया, पूरा परिसर “कन्हैया लाल की जय” के उद्घोष से गूंज उठा। पंचगव्य महाअभिषेक के दिव्य दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं और प्रत्येक श्रद्धालु उस अलौकिक क्षण का साक्षी बनने को उत्सुक दिखाई दिया।
श्रीमद्भागवत कथा का समापन और 56 भोग।
जन्माष्टमी महोत्सव के साथ ही सात दिनों से चल रही श्रीमद्भागवत कथा का भी समापन हुआ। कथा के दौरान प्रतिदिन भगवान को छप्पन भोग अर्पित किए गए। महोत्सव के अवसर पर 25,000 से अधिक श्रद्धालुओं को महाप्रसाद वितरित किया गया, जिससे पूरा परिसर सेवा और भक्ति की भावना से सराबोर दिखाई दिया।
युवाओं के लिए विशेष आकर्षण।
महोत्सव में युवाओं की विशेष भागीदारी देखने को मिली। विशाल एलईडी स्क्रीन पर भगवान श्रीकृष्ण की अद्भुत लीलाओं का प्रस्तुतीकरण किया गया, जिसने युवाओं को विशेष रूप से आकर्षित किया। साथ ही आयोजित कृष्ण ज्ञान क्विज़ में बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया। चयनित युवाओं को इस्कॉन के विशेष गीता अध्ययन कार्यक्रम से जुड़ने का अवसर प्रदान किया जाएगा।
झूलन दर्शन और आध्यात्मिक प्रदर्शनी बने आकर्षण का केंद्र।
मंदिर परिसर में सुसज्जित झूलन दर्शन ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। राधा-कृष्ण के सुंदर झूले के चारों ओर पुष्प सज्जा और भक्तों की भीड़ ने एक दिव्य वातावरण का निर्माण किया। इसके साथ ही आयोजित आध्यात्मिक पुस्तक प्रदर्शनी में भगवद्गीता, श्रीमद्भागवत तथा अन्य वैदिक ग्रंथों के साथ भक्ति संगीत एवं आध्यात्मिक चित्रों ने भी श्रद्धालुओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

