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सनातन वैदिक धर्म एवं संस्कृति की रक्षा हेतु राष्ट्रव्यापी एवं निर्णायक युद्ध की घोषणा।
आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा का ऐलान पाखण्ड और अनर्गल आक्षेपों का दिया जाएगा मुंहतोड़ जवाब।
रोहतक, 19 अगस्त : सनातन वैदिक धर्म, पूज्य ऋषियों, राष्ट्रनायकों एवं पवित्र वेद-शास्त्रों के विरुद्ध रचे जा रहे घिनौने कुत्सित षड्यंत्रों, पाखंड और मिथ्याचार के खिलाफ आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा ने दयानन्दमठ, रोहतक में एक आपातकालीन एवं प्रचंड पत्रकार वार्ता आयोजित कर आर-पार की जंग का बिगुल फूंक दिया है।
पत्रकार वार्ता में वेदप्रचार अधिष्ठाता स्वामी सच्चिदानन्द जी ने पाखण्डियों को ललकारते हुए अति-आक्रामक रुख में कहा कि सनातन वैदिक संस्कृति, पवित्र वेदों और महर्षि दयानन्द सरस्वती जी पर आक्षेप करने वालों को अब आर्यसमाज कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। यदि किसी ने भी हमारे धर्म, वेदों या ऋषियों के खिलाफ जहर उगलने का दुस्साहस किया, तो आर्यसमाज का बच्चा-बच्चा ईंट से ईंट बजा देगा। यह संघर्ष अब आर-पार का होगा और इस पाखण्ड को जड़ से उखाड़ फैंकने के बाद ही थमेगा।
स्वामी सच्चिदानन्द जी ने प्रमुखता से रेखांकित किया कि आर्यसमाज की बलिदान और शहादत की गौरवशाली परम्परा रही है। आर्यसमाज ने देश की आजादी, निजाम हैदराबाद आंदोलन, हिंदीरक्षा आंदोलन और गोरक्षा आंदोलन और इस पाखण्ड विरोधी मुहिम में अग्रणी भूमिका निभाकर अपने प्राणों की आहुति दी है। यदि धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए फिर से बलिदान देना पड़ा, तो आर्यसमाज का युवा रत्तीभर भी पीछे नहीं हटेगा। हमारे पूर्वजों, ऋषियों, आप्त पुरुषों जैसे भगवान् राम, योगिराज श्रीकृष्ण, आदि योगी शिवजी महाराज, सनातन हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए बलिदान हुए सिक्ख गुरुओं, सनातन परम्पराओं एवं सनातन हिन्दू धर्म संस्कृति पर रामपाल दास व उसके अनुयायियों द्वारा किसी भी तरह का कुठाराघात किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
महर्षि दयानन्द सरस्वती जी की इस महान् संस्था का निर्माण ही असत्य और पाखण्ड को मिटाने के लिए हुआ है। आज समाज में फिर से पाखण्ड फैलाया जा रहा है, जिसे खत्म करने के लिए आर्यसमाज का युवा तंत्र पूरे रणकौशल के साथ मैदान में उतर चुका है।
सभा के उपप्रधान उमेद सिंह शर्मा ने पाखंडी रामपाल दास और उसके अनुयायियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि पाखण्डियों में जरा भी नैतिक साहस है, तो वे वेदों और शास्त्रों पर आमने-सामने बैठकर डिबेट (शास्त्रार्थ) करें। फैसला अन्तिम और निर्णायक होगा। खोखली बयानबाजी करने के बजाय शास्त्रार्थ के मैदान में आकर मुकाबला करें।
2006 और 2013 के संघर्षों का स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि हमने चार-चार युवाओं की शहादत दी है। इस बार पहल हमारी तरफ से नहीं हुई है, लेकिन अगर हमारे ऋषियों पर आक्षेप किया गया तो अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें।
सभाप्रधान श्री धर्मवीर सिंह आर्य ने दो टूक शब्दों में कहा कि आर्यसमाज ने कभी भी अन्धविश्वास, पाखण्ड और सामाजिक बुराइयों से समझौता नहीं किया है। समाज में पनप रही हर बुराई को जड़ से उखाडक़र फैंकना ही आर्यसमाज का परम ध्येय है।
सभा के कोषाध्यक्ष श्री मोहित आर्य ने अधर्म और पाखण्ड पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि अधर्म और पाखण्ड का साम्राज्य धन, बल या छल के बल पर ज्यादा दिन नहीं टिक सकता। आर्यसमाज का एक-एक कार्यकर्त्ता अपनी निष्ठा, समर्पण और सभी संसाधनों को वैदिक सनातन धर्म की रक्षा में झोंकने के लिए पूरी तरह तत्पर है। पाखंडी तत्त्व यह मुगालते में न रहें कि वे धर्मप्रेमी समाज को अपने कुचक्रों से डरा लेंगे। धर्मरक्षा के इस निर्णायक युद्ध में साधन, समय और संकल्प की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। इस अधर्म की इमारत को हम सामाजिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर ध्वस्त करके ही दम लेंगे।
आर्य प्रतिनिधि सभा हरयाणा ने स्पष्ट किया कि सरकार और प्रशासन स्थिति की गंभीरता को समझे। यदि पाखण्डी अपनी हरकतों से बाज नहीं आए तो पैदा होने वाली किसी भी कानून-व्यवस्था की स्थिति की जिम्मेदारी पाखण्डियों और प्रशासन की होगी।
आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा मुख्य कार्यालय दयानन्दमठ, रोहतक (हरियाणा)


