यौन उत्पीड़न से बचने के लिए जागरुकता ज़रूरी : प्रो. मंजूला चौधरी

यौन उत्पीड़न से बचने के लिए जागरुकता ज़रूरी : प्रो. मंजूला चौधरी

हरियाणा संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक दूरभाष – 94161 91877

कुवि में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न पर कार्यशाला।

कुरुक्षेत्र, 14 अगस्त : यौन उत्पीड़न से बचने के लिए जागरुकता बहुत ही ज़रूरी है। अपने कार्यस्थल पर किसी का दबाव सहन न करें। दबाव देना, फब्तियां कसना, अश्लील इशारे करना यौन अपराध की श्रेणी में आता है। कार्य स्थल पर कार्य करते हुए मौखिक शब्दों पर ध्यान देना ज़रूरी है। यह विचार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की दूरस्थ एवं आनलाइन शिक्षा केन्द्र की निदेशक प्रो. मंजूला चौधरी ने बतौर मुख्यातिथि गुरुवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (केयूके) के प्रशिक्षण, योजना और निगरानी प्रकोष्ठ (टीपीएमसी) तथा आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के संयुक्त तत्वावधान में “कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013” विषय पर केयू में कार्यरत सहायकों के लिए डॉ. आर.के.सदन में आयोजित कार्यशाला में व्यक्त किए। इससे पहले दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया किया गया। कुवि की आंतरिक शिकायत समिति की अध्यक्ष प्रो. सुनीता सिरोहा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
प्रो. मंजूला चौधरी ने पोश अधिनियम के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भी यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) का उल्लेख किया गया है। आज के परिप्रेक्ष्य में हमें महिलाओं के प्रति अपनी सोच बदलने की जरूरत है। महिला सशक्तिकरण के लिए संस्कारों के साथ ही बेहतर शिक्षा और महिलाओं के प्रति सकारात्मक सोच का होना जरूरी है। कार्यस्थल व समाज में महिलाओं के व्यवहार में मिथक धारणाएँ देखी जाती है इन धारणाओं के कारण महिलाओं का शोषण निरंतर होता रहता है। जेंडर गेप को कम करने के लिए आर्थिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है।
केयू आईसीसी की अध्यक्ष प्रो. सुनीता सिरोहा ने प्रतिभागियों को इंटरनल कंप्लेंट कमेटी की कार्य प्रणाली के बारे में बताया जो विश्वविद्यालय को लैंगिक शोषण मुक्त परिसर बनाने में सदा कार्यरत रही है। उन्होंने कर्मचारियों को स्पष्ट किया कि यदि कोई शिकायत किसी भी स्तर पर गलत या झूठी पाई जाती है जो शिकायतकर्ता के विरूद्ध भी कार्यवाही करने का प्रावधान है।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (केयूके) के प्रशिक्षण, योजना और निगरानी प्रकोष्ठ (टीपीएमसी) के नोडल आफिसर व परीक्षा नियंत्रक डॉ. अंकेश्वर प्रकाश ने सभी अतिथियों का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा हमें अपने व्यवहार को नियमित चैक करना आवश्यक है ताकि हमें पता चल सके हमें कब, कहां और किसे क्या कहना है। मंच का संचालन नितिन ने किया।
इस अवसर पर डीन प्रो. प्रीति जैन, डॉ. अनिल, मीनाक्षी, सुनील कुमार, राहुल सहित कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रतिभागी सहायक मौजूद थे।

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