‘नीली क्रांति’ से समृद्धि की ओर- मछली पालन बना ग्रामीण विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया आधार’’सरकारी योजनाओं से मिल रहा संबल, मत्स्य पालन से खुल रहे आय और स्वरोजगार के नए द्वार’

कोरिया 22 जून 2026/ भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कृषि के साथ-साथ सहायक व्यवसायों को भी लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन्हीं में से एक है मछली पालन, जो आज केवल भोजन का स्रोत नहीं, बल्कि लाखों लोगों के लिए रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन चुका है। कम लागत, कम समय में बेहतर उत्पादन और बाजार में लगातार बढ़ती मांग के कारण मछली पालन ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भी किसानों से खेती को केवल धान उत्पादन तक सीमित न रखते हुए दलहन, तिलहन, उद्यानिकी, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन जैसे आयवर्धक व्यवसायों को अपनाने का आह्वान किया है। इसी सोच के अनुरूप भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाओं का संचालन कर रही हैं, जिससे किसानों और ग्रामीण युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।

’ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रहा मछली पालन’
ग्रामीण क्षेत्रों में मछली पालन एक ऐसा व्यवसाय है जिसे सीमित भूमि और अपेक्षाकृत कम पूंजी में शुरू किया जा सकता है। तालाब, जलाशय, नहर और अन्य जल स्रोतों का उपयोग कर किसान अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। बढ़ती आबादी और पौष्टिक भोजन की मांग के कारण मछली की खपत लगातार बढ़ रही है। प्रोटीन, विटामिन और खनिजों से भरपूर मछली स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।

मत्स्य पालन न केवल किसानों की आय बढ़ाता है, बल्कि मत्स्य बीज उत्पादन, आहार निर्माण, परिवहन, प्रसंस्करण और विपणन जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराता है।

’राज्य पोषित योजनाएँ बढ़ा रही हैं मत्स्य पालन की संभावनाएँ’
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से मत्स्य कृषकों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

’शिक्षण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम’
मत्स्य पालन की आधुनिक तकनीकों के प्रसार के लिए 10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनमें तालाब प्रबंधन, मत्स्य बीज उत्पादन, रोग नियंत्रण और विपणन संबंधी जानकारी दी जाती है। तकनीकी उन्नयन हेतु विशेष प्रशिक्षण भी संचालित किए जाते हैं।

प्रगतिशील मत्स्य पालकों को राज्य के बाहर सफल मत्स्य पालन मॉडल देखने और नई तकनीकों को समझने के लिए अध्ययन भ्रमण पर भेजा जाता है, जिससे वे अपने क्षेत्र में बेहतर तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित होते हैं।

’सहकारी समितियों को अनुदान’
मत्स्य सहकारी समितियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए अनुदान उपलब्ध कराया जाता है, जिससे उत्पादन और विपणन व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।

’नाव-जाल सहायता’
अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को नाव और जाल उपलब्ध कराकर पारंपरिक मछली पकड़ने की गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

’फुटकर मछली विक्रेताओं को सहायता’
आइस बॉक्स, तराजू और अन्य आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता से छोटे मछुआरों को बेहतर बाजार और अधिक लाभ प्राप्त हो रहा है।

अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को स्पॉन संवर्धन और झींगा सह मछली पालन के लिए विशेष सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके।

भारत सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, रोजगार सृजन और मछुआरों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से संचालित इस योजना के तहत अनेक महत्वपूर्ण गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

’फिश हैचरी और नए तालाब निर्माण’
मत्स्य बीज उत्पादन बढ़ाने तथा नए तालाबों के निर्माण के लिए आकर्षक अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे मत्स्य पालन के लिए आधारभूत संरचना मजबूत हो रही है।

मछलियों की बेहतर वृद्धि के लिए संतुलित आहार व्यवस्था, रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (त्।ै) जैसी आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

’सजावटी मछली पालन और केज कल्चर’
सजावटी मछली पालन इकाइयों तथा जलाशयों में केज कल्चर को बढ़ावा देकर स्वरोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं।

शीत संयंत्र, प्रशीतित वाहन, आइस बॉक्स युक्त मोटरसाइकिल, ई-रिक्शा और लाइव फिश सेंटर जैसी सुविधाओं से मछलियों की गुणवत्ता बनाए रखते हुए बेहतर विपणन सुनिश्चित किया जा रहा है।

’मछुआरों के लिए सामाजिक सुरक्षा का मजबूत कवच’
मत्स्यजीवियों की आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ भी संचालित की जा रही हैं।

बंद अवधि के दौरान मछुआरों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए बचत सह राहत योजना संचालित है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार का भी योगदान रहता है।

’निःशुल्क समूह बीमा योजना’
दुर्घटना, मृत्यु या अपंगता की स्थिति में मछुआरों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए समूह बीमा योजना लागू है, जिससे संकट की घड़ी में उन्हें वित्तीय सहायता मिल सके।

’आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में मजबूत कदम’
मछली पालन आज ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है। सरकार की विभिन्न योजनाएँ किसानों, युवाओं, महिलाओं तथा अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लोगों को स्वरोजगार के नए अवसर प्रदान कर रही हैं। आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएँ सृजित हो रही हैं।

यदि किसान और इच्छुक हितग्राही इन योजनाओं का लाभ लेना चाहते हैं, तो वे अपने नजदीकी मत्स्य विभाग कार्यालय से संपर्क कर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। मछली पालन न केवल आय बढ़ाने का साधन है, बल्कि आत्मनिर्भर और समृद्ध ग्रामीण भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

VVNEWS वैशवारा

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