
हरियाणा संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक।
सह संपादक – डॉ. संजीव कुमारी।
कुरुक्षेत्र, 28 जून : श्री दुर्गा देवी मंदिर पिपली, कुरुक्षेत्र के पीठाधीश और समर्थगुरु धारा हिमाचल के ज़ोनल कोऑर्डिनेटर
आचार्य डॉ.मिश्रा ने बताया कि समर्थगुरु धाम, मुरथल, हरियाणा के संस्थापक समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया जी के सान्निध्य में स्पैशल महाजीवन प्रज्ञा और स्पैशल ऊर्जा योग के फीडबैक सेशन में खुशियों से भरे दिव्य उत्सव मनाया गया।
संपूर्ण भारत से आये प्रतिभागियों ने अहोभाव प्रकट किया। भक्ति और कृतज्ञता के साथ भगवान की दिव्य ऊर्जा और समर्थगुरु की अनंत कृपा का अनुभव किया।
शिकायत से अहोभाव की यात्रा का नाम आध्यात्मिकता है।
समर्थगुरु धाम में सहज योग का एक अनूठा संयोजन है जिसके ये मुख्य कार्यक्रम निम्नलिखित है :
ए. ज्ञान योग 14 कार्यक्रम बी. भक्ति योग 14 कार्यक्रम सी. हठ योग 16 कार्यक्रम डी. कर्म योग 23 कार्यक्रम सभी को समर्थगुरु द्वारा वैज्ञानिकता और आध्यात्मिकता के आधार पर बहुत सुंदर डिज़ाइन किया गया है ।
सच्चे शिष्य अपने समयानुसार चाहें तो समर्थगुरू धाम मुरथल के हरे भरे वातावरण में समर्थगुरु के सान्निध्य में कर सकते है। जो सच्चे शिष्य किसी भी कारण से असमर्थ है तो समर्थगुरू धाम से ऑनलाइन भी कर सकते है।
इसी श्रृंखला में समर्थगुरु धाम, मुरथल, हरियाणा में 10 जुलाई से 12 जुलाई 2026 को अजपा सिद्ध योग कार्यक्रम में संतो की तरह निरोगी रहकर नाद श्रवण के साथ साक्षी में जीने की कला जान पाएंगे।
गुरु-शिष्य परम्परा से जुड़कर अपने जीवन को संवारने के लिए 13 जुलाई से 15 जुलाई 2026 को सिद्धार्थ ध्यान योग हो रहा है जिसमें महात्मा बुद्ध की विपस्सना , परमगुरु ओशो और समर्थगुरु की प्रभावशाली ध्यान विधियां, गुरु गोरखनाथ एवं संत कबीर का अजपा, गुरुनानक देव का एक ओंकार सतनाम और महर्षि पतंजलि की समाधि के साथ सांस सांस सुमिरन की कला दी जाएगी।
ट्विटर के माध्यम से आदरणीय समर्थगुरू सिद्धार्थ औलिया ने विशेष बताया कि साक्षी का अर्थ है अपने निराकार स्वरूप का बोध रखते हुए कर्म करने का मजा लेना।


