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भारतीय योग संस्थान ने कार्यकर्ताओं को करवाई शंख प्रक्षालन क्रिया

भारतीय योग संस्थान ने कार्यकर्ताओं को करवाई शंख प्रक्षालन क्रिया।

वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक।

मुख्य शंख प्रक्षालन क्रिया रविवार, 13 अप्रैल को योगाश्रम में प्रातः 6:00 बजे होगी।

कुरुक्षेत्र 28 मार्च, भारतीय योग संस्थान, कुरुक्षेत्र जिला इकाई द्वारा योगाश्रम, ढ़ांढ़ रोड़, मिर्जापुर, कुरुक्षेत्र (गांव मिर्जापुर से एक किलोमीटर आगे और नहर से 200 मीटर पहले बाईं ओर) में आज उन कार्यकर्ताओं को जो 13 अप्रैल को योगाश्रम मिर्जापुर में ही होने वाले मुख्य शंख प्रक्षालन कार्यक्रम में सेवा करेंगे, शंख प्रक्षालन क्रिया करवाई गई । प्रातः 6:00 बजे संस्थान के योगाश्रम मिर्जापुर में आयोजित कार्यक्रम में 20 से अधिक कार्यकर्ताओं ने शंख प्रक्षालन क्रिया की । संस्थान की हरियाणा प्रांत इकाई के प्रांतीय प्रेस प्रवक्ता गुलशन कुमार ग्रोवर द्वारा शंख प्रक्षालन क्रिया के निषेध, सावधानियां, लाभ व विधि बताकर यह क्रिया करवाई गई । प्रांतीय प्रधान ओमप्रकाश ने शंख प्रक्षालन के पश्चात सभी को 30 मिनट का शवासन करवाया । अंत में प्रांतीय कोषाध्यक्ष सुरेश कुमार अरोड़ा, जिला प्रधान देवी दयाल सैनी व सौरभ मोदी द्वारा बनाई गई देसी घी से तर स्वादिष्ट खिचड़ी सभी को खिलाई गई । अर्जुन जिला प्रधान मनीराम सैनी, कृष्ण जिला मंत्री हेम सिंह राणा, समालखा से रविंद्र छौकर सहित सभी स्थानीय जिलों के कार्यकर्ता उपस्थित थे।
शंख प्रक्षालन है क्या ? इसे क्यों करें ? इसके लिए क्या क्या सावधानियां आवश्यक हैं ?
संस्थान के प्रांतीय प्रधान ओम प्रकाश ने बताया कि यहां शंख का अर्थ है पेट या आंतें और प्रक्षालन का अर्थ है धोना। इस क्रिया से अंत:वाहिनी नली कंठ से गुदा तक शुद्ध हो जाती है । शंख प्रक्षालन क्रिया वर्ष में केवल दो बार बदलते मौसम में ही की जा सकती है । इस समय मौसम इस क्रिया के लिए अनुकूल है । शंख प्रक्षालन एक ऐसी यौगिक शुद्धि क्रिया है, जिसमें पानी पीकर कुछ सरल से योगासनों के 5 – 5 सैट किए जाते हैं, पांच बार इस क्रम को दोहराकर मल निष्कासन के लिए शौचालय जाया जाता है । यह पूरी क्रिया पांच – छः बार की जाती है । पहली बार शौच जाने पर सामान्य मल निकलता है, दूसरी बार कुछ पतला, तीसरी बार और अधिक पतला, फिर पानी के साथ मल के छोटे-छोटे टुकड़े और अंत में स्वच्छ पानी जैसा मल निकलता है तो क्रिया संपन्न हो जाती है।
सामान्य साधक कि यह धारणा रहती है कि उसे कब्ज नहीं है तो उसका पेट साफ है, परंतु वास्तविकता यह है कि सभी की अंतड़ियो में काफी मात्रा में मल जमा रहता है । जब हम यह क्रिया करते हैं और हमारा मल अंतड़ियों में से उखड़-उखड़ कर शौच द्वारा बाहर आता है तो हमारा यह भ्रम दूर हो जाता है कि हमारा पेट साफ है । इस क्रिया से पेट के रोग, फेफड़े, वात-पित्त-कफ के रोग, गर्मी से होने वाले रोग, सर्दी-जुकाम, नेत्र संबंधी विकार व सिर दर्द इत्यादि रोग भी ठीक होते हैं । यह क्रिया करने के लगभग 6 महीने बाद तक हमारा पेट ठीक रहता है और हमारी साधना में भी निखार आता है।
निषेध : आंतों की कमजोरी, आंतों में सूजन, गंभीर हृदय रोगी, उच्च रक्तचाप के रोगी व अल्सर के रोगी को शंख प्रक्षालन क्रिया नहीं करनी चाहिए।
सावधानियां : 1. शंख प्रक्षालन करने वाले साधक एक दिन पहले रात्रि भोजन न करें तो बहुत अच्छा रहता है । यदि कोई साधक बिना भोजन के नहीं रह सकता तो वह सूर्यास्त के 1 घंटे बाद तक ताजा फल या ताजा फलों का जूस अथवा कम मात्रा में हल्का सुपाच्य भोजन जैसे दलिया, खिचड़ी, दाल-रोटी इत्यादि ग्रहण कर सकता है । साधक रात्रि में पूरी नींद लेकर आराम करें तो यह क्रिया भली भांति संपन्न होती है।
प्रांतीय प्रेस प्रवक्ता गुलशन कुमार ग्रोवर ने बताया कि संस्थान के साधकों व आम जनता के लिए शंख प्रक्षालन क्रिया संस्थान के योगाश्रम मिर्जापुर में ही रविवार, 13 अप्रैल 2025 को प्रातः 6:00 बजे से करवाई जाएगी । इच्छुक साधकों को नीचे बिछाने के लिए एक चादर ( चादर सफेद रंग की हो तो बहुत अच्छा) लेकर शंख प्रक्षालन स्थल पर समय से पहले पहुंचकर खिचड़ी के लिए अपनी सहयोग राशि जमा करवा कर रजिस्ट्रेशन करवाना होगा । क्रिया से संबंधित अन्य सभी आवश्यक निर्देश मौके पर बताये जाएंगे ।
शंख प्रक्षालन क्रिया करने के इच्छुक साधक इस क्रिया में भाग लेने की पूर्व सूचना 11 अप्रैल तक भारतीय योग संस्थान, कृष्ण योग जिला, कुरुक्षेत्र के प्रधान श्री देवी दयाल सैनी जी को उनके फोन नंबर 9467515206 पर अवश्य दे दें ।
योगाश्रम मिर्जापुर में शंख प्रक्षालन क्रिया के लिए योगासन करते भारतीय योग संस्थान के कार्यकर्ता।

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