
साधना में नाद दीक्षा का बहुत महत्त्व है : समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया
कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 13 अप्रैल : श्री दुर्गा देवी मंदिर पिपली, कुरुक्षेत्र के पीठाधीश और समर्थगुरु धारा हिमाचल के ज़ोनल कोऑर्डिनेटर आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि समर्थगुरु धाम मुरथल हरियाणा के संस्थापक समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया के
सान्निध्य में 11 अप्रैल से 13 अप्रैल 2026 तक सिद्धार्थ ध्यान योग कार्यक्रम का भव्य आयोजन हुआ।
समर्थगुरु धारा मैत्री संघ जम्मू कश्मीर के कोऑर्डिनेटर आचार्य डॉ. विजय शर्मा और जम्मू कश्मीर के साधकों की टीम ने बहुत सुन्दर और भव्य आयोजन किया।
ट्विटर के माध्यम से आदरणीय समर्थगुरू जी ने आज बताया कि आत्मा से जुड़ना ज्ञान है। परमात्मा अर्थात् हुकमी से जुड़ना भक्ति है।
हुकमी और हुकम (ऋत, ताओ, परम नियम) दोनों से जुड़कर जीना संतत्व है।
नर का उद्गम नारायण है,अपने उद्गम की खोज करो।
कुछ ग्रंथ पढ़ो स्वाध्याय करो, सत्संग नया हर रोज करो।
मंजिल के पहले रुको नहीं , बाधा के सन्मुख झुको नहीं।
पुरुषार्थं शरणं गच्छामि , गोविंदं शरणं गच्छामि।
जम्मू में सिद्धार्थ ध्यान योग के प्रतिभागियों को समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया जी द्वारा नाद दीक्षा प्रदान की गई। लगभग 400 प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
जिनमें 180 से अधिक नए प्रतिभागी शामिल थे।
सभी साधकों ने अहोभाव और हार्दिक कृतज्ञता के साथ उत्सव मनाया, क्योंकि उन्हें ‘दिव्य नाद’ के अनमोल अनुभव का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
सभी आचार्यों द्वारा साधकों को सिद्धार्थ ध्यान योग में अपने जीवन को सुंदर ढंग से जीने के लिए महात्मा बुद्ध के अष्टांगिक मार्ग के साथ साथ आत्मा और परमात्मा का ध्यान करने की कला अद्भुत ढंग से सिखलाई जाती है।
इस विशेष कार्यक्रम में समर्थगुरु धाम की मुख्य
सचिव मां मीराबाई, समर्थगुरू धाम के केंद्रीय संयोजक आचार्य दर्शन, आचार्य अमरेश झा, आचार्य अमोल, स्वामी सुशील और आचार्य डॉ. विदुषी शर्मा आदि के साथ बहुत साधक अपने परिवार और मित्रों के साथ उपस्थित रहें।


