
एक तरफ चंपत, दूसरी तरफ आशीष… जाने कौन है किससे बीस
आजमगढ़। अयोध्या में श्रीराम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और उसके प्रबंधन को लेकर उठे सवालों के बीच अब आजमगढ़ का भैरव धाम भी चर्चा का विषय बना हुआ है। दोनों मामलों की प्रकृति अलग है, लेकिन एक समानता जरूर दिखाई दे रही है—दोनों जगह आमजन पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
आजमगढ़ के नगर पंचायत महराजगंज स्थित बाबा भैरव धाम में कराए गए सुंदरीकरण एवं विकास कार्यों का ब्यौरा सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मांगा गया था। आरोप है कि बार-बार आवेदन और राज्य सूचना आयोग के आदेशों के बावजूद मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। इस पर उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए नगर पंचायत महराजगंज के जन सूचना अधिकारी एवं अधिशासी अधिकारी आशीष राय पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड अधिरोपित कर दिया। साथ ही अर्थदंड की वसूली तक वेतन अवरुद्ध रखने का निर्देश भी जारी किया गया है।
राज्य सूचना आयोग ने अपने आदेश में कहा कि कई अवसर दिए जाने के बाद भी न तो सूचना उपलब्ध कराई गई और न ही संबंधित अधिकारी आयोग के समक्ष उपस्थित होकर संतोषजनक स्पष्टीकरण दे सके। आयोग ने अंतिम अवसर देते हुए अगली सुनवाई में स्वयं उपस्थित होकर सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं।
उधर, अयोध्या में मंदिर से जुड़े चढ़ावे को लेकर उठे विवाद ने भी देशभर में चर्चा छेड़ रखी है। ऐसे में सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर लोग दोनों घटनाओं की तुलना करते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों के बीच एक जुमला भी चर्चा में है—”एक तरफ चंपत, दूसरी तरफ आशीष… जाने कौन है किससे बीस।”
हालांकि, यह उल्लेखनीय है कि अयोध्या और आजमगढ़ के दोनों मामले अलग-अलग प्रकृति के हैं और दोनों की जांच एवं कानूनी प्रक्रियाएं अपने-अपने स्तर पर चल रही हैं। फिर भी इन घटनाओं ने यह संदेश जरूर दिया है कि सार्वजनिक धन, धार्मिक स्थलों से जुड़े विकास कार्यों और सरकारी जवाबदेही के मामलों में पारदर्शिता की मांग पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है।


