
ई-पंजीकरण नीति का विरोध: दूसरे दिन भी ठप रहा रजिस्ट्री का काम, बैनामा लेखकों का प्रदर्शन जारी
विशेष संवाददाता,
16 जून, 2026
सरकार की नई ई-पंजीकरण (E-Registration) और फ्रंट ऑफिस व्यवस्था के विरोध में बैनामा लेखकों (दस्तावेज लेखकों), अधिवक्ताओं और स्टांप वेंडरों का प्रदर्शन आज दूसरे दिन भी लगातार जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने उप-निबंधक (सब-रजिस्ट्रार) कार्यालयों के बाहर तालाबंदी और नारेबाजी करते हुए कामकाज पूरी तरह ठप रखा। इस हड़ताल के चलते जमीन, मकान और दुकानों की खरीद-फरोख्त (रजिस्ट्री) से जुड़े सभी कार्य पूरी तरह रुक गए हैं, जिससे सरकार को लाखों-करोड़ों रुपये के राजस्व (Revenue) का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
निजीकरण और बेरोजगारी का आरोप
बैनामा लेखक संघ के पदाधिकारियों का आरोप है कि सरकार इस नई व्यवस्था के जरिए पूरी पंजीकरण प्रक्रिया को निजी कंपनियों (Private Companies) के हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। प्रदर्शन कर रहे लेखकों का कहना है कि अगर यह काम निजी हाथों में चला गया, तो प्रदेश भर के लाखों बैनामा लेखकों, उनके सहयोगियों, कंप्यूटर ऑपरेटरों और स्टांप वेंडरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा और वे भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे।
”सरकार की यह नई नीति जनविरोधी और रोजगार विरोधी है। जब तक ई-पंजीकरण के इस अव्यवहारिक आदेश को वापस नहीं लिया जाता, हमारा आंदोलन और कार्य बहिष्कार अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।”
— [अध्यक्ष/पदाधिकारी का नाम], दस्तावेज लेखक संघ
जनता परेशान, बस्ते रहे बंद
हड़ताल के दूसरे दिन भी सब-रजिस्ट्री कार्यालयों के बाहर सन्नाटा पसरा रहा। बैनामा लेखकों और वकीलों ने अपने बस्ते (काम करने की टेबल) नहीं खोले। दूर-दराज के क्षेत्रों से अपनी संपत्तियों की रजिस्ट्री कराने आए आम नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और उन्हें बिना काम कराए ही वापस लौटना पड़ा। लोगों का कहना है कि वकीलों और लेखकों के इस कड़े रुख के कारण उनकी जरूरी डीड और एग्रीमेंट लटक गए हैं।
मुख्य मांगें:
ई-पंजीकरण व्यवस्था को तत्काल वापस लिया जाए।
फ्रंट ऑफिस और निजी कंपनियों के हस्तक्षेप को पूरी तरह रोका जाए।
पारंपरिक दस्तावेज लेखन व्यवस्था को सुरक्षित रखकर उसमें जरूरी जन-सुविधाएं जोड़ी जाएं।
तहसील प्रशासन और सब-रजिस्ट्रार के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और काम पर लौटने की अपील की, लेकिन आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो इस आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। आंदोलन में कोषाध्यक्ष अमजद शेख सहित भारी संख्या में कानूनी और रजिस्ट्री कार्य से जुड़े पेशेवर शामिल हुए। प्रदर्शन में मुख्य रूप से उदय प्रताप सिंह, प्रवेश दीक्षित, पंकज तिवारी, अवशेष कुमार यादव, सुमंत सिंह, रमेश चौहान, उमेर खान, मंगला सिंह, अभय नारायण कुंवर, जनार्दन सिंह, अभय कुमार, दूधनाथ मधुकर, बिपिन सिंह, रूपचंद्र सिंह, रमेश यादव, शैलेंद्र कुमार सिंह, अजय राय, बिनोद अस्थाना, देशराज चौहान, आनंद कुमार, मनोज चौहान, शशिकांत सिंह, सोनू कुमार, रामाश्रय सिंह, राकेश यादव, अंकित सिंह, शैलेन्द्र प्रताप सिंह, कपिलदेव यादव, सूरज प्रकाश यादव, अतुल कुमार, प्रवीण कुमार, परपुदमन मौर्य तथा शिवांगी यादव सहित सैकड़ों लोग एकजुट नजर आए।
लेखक अभय कुमार ,सोनू कुमार उमेश कुमार विपिन कुमार प्रविन कुमार

