सुरों के साथ सामाज सेवा मे भी अग्रणी : शंकर साहनी

सुरों के साथ सामाज सेवा मे भी अग्रणी : शंकर साहनी
भारतीय संगीत जगत में अपनी दमदार पहचान बना चुके मशहूर गायक शंकर साहनी आज न सिर्फ अपनी आवाज़ से बल्कि अपने समाजसेवी कार्य से भी लोगों के दिलों पर राज कर रहे है वे उन चुनिंदा कलाकारों में से हैं जिन्होंने कला के साथ साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी बखूबी निभाया है
संगीत की शुरुआत उन्होंने अपने गुरु और पिता स्व श्री तेज बहादुर साहनी से की उनके मार्गदर्शन में शंकर साहनी ने संगीत की गहराइयों को समझा और अपनी मेहनत से एक अलग मुकाम हासिल किया
उनके सुपरहिट गानों में कुड़ी कुरमुरी, यारी यारी, एक मंगया सी यार रब्बा हाथ जोड़ के, जट लूटया गया जैसे कई गीत शामिल है जो आज भी श्रोताओं के दिलों में बसे हुए हैं वहीं उनका आध्यात्मिक प्रस्तुतीकरण महामृत्युंजय जाप पूरे विश्व में प्रसिद्ध हो चुका है और करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र बना है
लेकिन शंकर साहनी की पहचान सिर्फ एक गायक तक नहीं सीमित नहीं है वह एक सक्रिय समाज सेवक भी है समय समय पर वे जरुरतमंद लोगों की मदद, धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमो में भागीदारी और जनहित से जुड़े कार्यों मे अपना योगदान देते रहते है
उनके अनुसार संगीत सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि समाज को जोड़ने और सही राह दिखाने का माध्यम भी है
आज के दौर में जब कलाकार केवल अपने करियर तक सीमित रह जाते है ऐसे में शंकर साहनी जैसे व्यक्तित्व समाज के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं




