
संस्कृत भाषा के ग्रंथों में छिपा है अनेक समस्याओं का समाधान : प्रो. रीटा
आईआईएचएस के संस्कृत विभाग में दीक्षा सत्र, संस्कृत सप्ताह एवं गीता स्वाध्याय सत्र का आयोजन।
कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 27 अगस्त : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड एंड ऑनर्स स्टडीज (आईआईएचएस) के संस्कृत विभाग द्वारा दीक्षा सत्र, संस्कृत सप्ताह एवं गीता स्वाध्याय सत्र का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर संस्थान की प्राचार्या प्रो. रीटा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि संस्कृत भाषा के ग्रंथों में अनेक समस्याओं का समाधान निहित है। संस्कृत देवभाषा है तथा वेद, श्रीमद्भगवद्गीता, रामायण और भारतीय दर्शन में अथाह ज्ञान का सागर समाहित है। यह भाषा देश, काल और सीमाओं से परे मानव मात्र के कल्याण का संदेश देती है। वास्तुशास्त्र, आयुर्वेद और ज्योतिष सहित अनेक भारतीय ज्ञान परंपराओं का आधार संस्कृत भाषा ही है।
संस्कृत विभाग के अध्यक्ष एवं आयोजन समिति के संयोजक डॉ. रामचन्द्र ने कहा कि संस्कृत एक वैज्ञानिक एवं समृद्ध भाषा है, जिसमें लाखों वर्षों की भारतीय ज्ञान परंपरा समाहित है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष संस्कृत विभाग में 100 से अधिक विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। संस्कृत का अध्ययन करना सौभाग्य की बात है। दीक्षा सत्र के अंतर्गत विद्यार्थियों को संस्कृत विभाग की गौरवपूर्ण परंपरा से परिचित करवाया गया। विद्यार्थियों को संस्कृत श्लोकोच्चारण एवं सम्भाषण का अभ्यास कराया गया, जिसमें उन्होंने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ भी किया गया।
प्राचार्या प्रो. रीटा ने सभी विद्यार्थियों को अष्टादश श्लोकी गीता’’ की पुस्तिका उपहार स्वरूप प्रदान की। विद्यार्थियों ने इसके नियमित पाठ का संकल्प लिया। इस लघु पुस्तिका में गीता के सभी 18 अध्यायों से चयनित श्लोकों के माध्यम से विद्यार्थियों के जीवन में सफलता, उन्नति एवं सकारात्मक सोच के लिए महत्वपूर्ण प्रेरणा सूत्रों का संकलन किया गया है। आयोजन में मनीषा, स्वाति, अंजलि, मंजू, ब्रह्म जाया एवं वीर प्रताप का विशेष सहयोग रहा। इस अवसर पर प्रो. पूनम, प्रो. जसविंदर सहित अनेक शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।


