युवाओं ने अंधविश्वास, पाखण्ड को समाप्त करने का संकल्प लिया

युवाओं ने अंधविश्वास, पाखण्ड को समाप्त करने का संकल्प लिया

वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक

राज्यपाल आचार्य देवव्रत की प्रेरणा से भारतीय संस्कृति और वैदिक मूल्यों को आत्मसात कर रहे युवा।

कुरुक्षेत्र 11 जून : गुरुकुल में चल रहे प्रान्तीय आर्यवीर दल शिविर में आज सभी आर्यवीरों का यज्ञोपवीत संस्कार सम्पन्न हुआ। आचार्य दयाशंकर शास्त्री जी के मार्गदर्शन वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच सभी आर्यवीरों ने जनेऊ धारण किया। उन्होंने कहा कि यज्ञोपवीत के ये तीन धागे हमें अपने देवों के प्रति, हमारे ऋषियों के प्रति तथा हमारे माता-पिता के प्रति हमारे जो ऋण, कर्त्तव्य और दायित्व हैं उनका स्मरण कराते हैं। पहला ऋण माता-पिता का ऋण है, दूसरा ऋण गुरुओं का ऋण है तथा तीसरा ऋण ऋषि ऋण होता है, हमें इन तीनों ऋणों से उऋण होने के लिए हमें श्रेष्ठ कार्य करने चाहिए। वैदिक संस्कृति में यज्ञोपवीत का बड़ा महत्त्व है। उन्होंने कहा कि मुगलकाल में वीर शिवाजी ने जनेऊ धारण करने के लिए बहुत परिश्रम किया था और लगभग 9 लाख की बड़ी राशि खर्च करने के उपरान्त उन्हें यज्ञोपवीत मिला था। यज्ञोपवीत संस्कार के उपरान्त सभी आर्यवीरों ने समाज से पाखण्ड, अंधविश्वास आदि बुराइयों को मिटाने का संकल्प लिया। इस दौरान युवाओं ने भारी संख्या में हाथों व गले में पहने हुए काले धागे, कंडे-ताबीज आदि उतारकर पांखण्ड से दूर रहने का संदेश दिया। इस अवसर पर भजनोपदेशक महाशय जयपाल आर्य, प्रशिक्षण प्रमुख संजीव आर्य, मनीराम आर्य, वरिष्ठ योग शिक्षक सूर्यदेव आर्य, व्यायाम शिक्षक संदीप वैदिक सहित सभी प्रशिक्षक मौजूद रहे।
जयपाल आर्य ने कहा कि गुण और अवगुण सभी में होते हैं मगर जो लोग अपने अवगुणों को दूर करके गुणों का विकास करते हैं, हमेशा समाज कल्याण के कार्य हेतु तत्पर रहते हैं वहीं जीवन में उन्नति के शिखर पर पहुंचते हैं। हमें अपने आचरण और व्यवहार में मधुरता लानी चाहिए, दूसरों से जैसे व्यवहार की अपेक्षा करते हैं, स्वयं भी वैसा ही व्यवहार करें। छोटी-छोटी बातों पर निराश न हों, असफलताओं से कतई न घबराएं बल्कि समय के एक-एक क्षण का सदुपयोग करते हुए अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए एकाग्रचित्र होकर लगातार प्रयत्न करें, आप अवश्य सफल होंगे। बता दें कि महामहिम राज्यपाल आचार्य देव्रवत ज
की प्रेरणा एवं आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाण के तत्त्वावधान में चल रहे प्रान्तीय आर्य वीर दल शिविर में कुरुक्षेत्र, कैथल, पानीपत, जीन्द आदि जिलों के विभिन्न गाँवों से 500 युवा भाग ले रहे हैं जिन्हें आर्य वीर दल के 20 से अधिक शिक्षकों द्वारा जूड़ो-कराटे, लाठी संचलन, डम्बल, लेजियम, स्तूप-निर्माण, दंड-बैठक तथा विभिन्न योगासनों के शारीरिक प्रशिक्षण के अतिरिक्त महाशय जयपाल आर्य, जसविन्द्र आर्य, संदीप वैदिक आदि विद्वानों द्वारा बौद्धिक ज्ञान भी प्रदान किया जा रहा है।

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