Uncategorized

ध्यान से जागेगा अंतर्मन, जीवन बनेगा संतुलित एवं सफल : डॉ. संजय मालपाणी

हरियाणा संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक दूरभाष – 94161 91877

कुरुक्षेत्र, 27 मार्च :
गीता परिवार द्वारा आयोजित आध्यात्मिक गतिविधियों के अंतर्गत आज ध्यान (मेडिटेशन) विषय पर एक प्रेरणादायी सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गीता परिवार के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ. संजय मालपाणी जी के मार्गदर्शन में ध्यान के महत्व, उसके वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक पक्ष तथा जीवन में उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला गया।
अपने संदेश में डॉ. संजय मालपाणी जी ने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य बाहरी उपलब्धियों की दौड़ में इतना व्यस्त हो गया है कि उसने अपने भीतर की शांति और संतुलन को खो दिया है। ऐसे में ध्यान ही वह माध्यम है, जो मनुष्य को स्वयं से जोड़ता है और उसे भीतर से मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि ध्यान केवल साधना नहीं, बल्कि आत्म- जागरण की प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता में भी मन को स्थिर और नियंत्रित करने पर विशेष बल दिया गया है। ध्यान के अभ्यास से मन एकाग्र होता है, विचार शुद्ध होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे न केवल मानसिक तनाव कम होता है, बल्कि निर्णय लेने की क्षमता और कार्यकुशलता भी बढ़ती है।
विशेष रूप से युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि युवा पीढ़ी नियमित रूप से ध्यान को अपने जीवन का हिस्सा बना ले, तो वे न केवल अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि एक सशक्त, संतुलित और जागरूक समाज का निर्माण भी कर सकते हैं। सभी के साथ प्रेम भाव से रहें, अपने आप को प्रभू को समर्पित करें।
डॉ. मालपाणी जी ने यह भी बताया कि गीता परिवार विगत 40 वर्षों से समाज में आध्यात्मिक जागरण, संस्कार निर्माण एवं जीवन मूल्यों के प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। ध्यान, योग, गीता अध्ययन एवं बाल संस्कार शिविरों के माध्यम से हजारों लोग लाभान्वित हो रहे हैं।
अंत में सभी उपस्थित जनों से नियमित ध्यान करने का आह्वान किया गया, ताकि वे अपने जीवन में शांति, संतुलन और सफलता का अनुभव कर सकें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
plz call me jitendra patel