त्याग, तपस्या और साधना की महान विभूतियों को भावभीनी श्रद्धांजली

कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 27 मार्च : ब्रह्माकुमारीज कुरुक्षेत्र में पुण्य स्मृति दिवस पर दिव्य गुणों को धारण करने का लिया संकल्प।
ब्रह्माकुमारीज विश्व शांति धाम सेवा केंद्र, कुरुक्षेत्र में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की वरिष्ठ दादियों – दादी जानकी ,दादी हृदय मोहिनी, दादी चंद्रमणि एवं प्रेम दीदी- की पुण्य स्मृति दिवस पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित सभी ब्रह्मा वत्सों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके दिव्य गुणों को जीवन में धारण करने का संकल्प लिया।
मार्च माह में इन महान आत्माओं के अव्यक्त होने के उपलक्ष्य में 27 मार्च को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। केंद्र प्रभारी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज बहन ने दिव्य आत्माओं के चित्रों पर पुष्पमाला अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
अपने उद्बोधन में उन्होंने बताया कि कुरुक्षेत्र की पावन भूमि पर लगभग 61–62 वर्ष पूर्व प्रेम दीदी ने लक्ष्मण भाई के साथ मिलकर ब्रह्माकुमारी संस्था का एक छोटा सा पौधा लगाया था, जो आज एक विशाल वटवृक्ष के रूप में विकसित होकर समाज को आध्यात्मिक दिशा प्रदान कर रहा है। यह उनके त्याग, तपस्या और अथक सेवाओं का ही परिणाम है।
उन्होंने बताया कि कुरुक्षेत्र सेवा केंद्र पंजाब ज़ोन के अंतर्गत आता है, जिसका संचालन दादी चंद्रमणि ने किया। दादी चंद्रमणि सच्चे, निष्कपट, निर्भय एवं गुणग्राही व्यक्तित्व की धनी थीं। उनकी तपस्या और नेतृत्व के कारण उन्हें “शेर-ए-पंजाब” की उपाधि से सम्मानित किया गया।
राजयोगिनी दादी जानकी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए सरोज बहन ने कहा कि सीमित औपचारिक शिक्षा (चौथी कक्षा तक) के बावजूद उन्होंने 104 वर्ष की आयु तक विश्व के लगभग 140 देशों में समाज सेवा, आध्यात्मिक जागृति और विश्व शांति के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्हें विश्व की सबसे स्थिर मन वाली महिला होने का गौरव भी प्राप्त हुआ।
उन्होंने आगे बताया कि दादी गुलजार, जिन्हें अव्यक्त नाम “हृदय मोहिनी” प्राप्त हुआ, परमधाम से परमात्मा का संदेश सुनाती थीं, जिसे ‘मुरली’ कहा जाता है। इन महान आत्माओं ने त्याग, तपस्या और साधना के आदर्श स्थापित करते हुए परमपिता परमात्मा की श्रीमत पर चलकर जीवन को श्रेष्ठ बनाया और माया पर विजय प्राप्त की।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने इन महान विभूतियों के जीवन आदर्शों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर बीके राधा, बीके लता, बीके पुष्पा, बीके नेहा, बीके प्रियंका, बीके पूनम, बीके आरती, बीके भारती, बीके सिमरन, बीके संतोष सहित अनेक बहनों ने श्रद्धांजलि अर्पित कर अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं। कार्यक्रम में गीता, सुमन, हेमलता, शकुंतला, राजमाता, ज्योति, निशा, जरनैल, भगती देवी, माला, गिरिजा, हीरा, संतोष, हर्षा, सोनम, राजकुमारी, पूजा, बीके सतीश कात्याल, हरबंस सिंह, राजेश, सुरेश, कृष्ण कुमार, डॉ. आर. डी. शर्मा, जगदीश, केवल कृष्ण, राजकुमार, संत कुमार, रघुवीर सिंह, सम्पूर्ण सिंह, श्यामलाल सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।



