
आज की कंटेंट-ड्रिवन अर्थव्यवस्था में भरोसा ही असली मुद्रा है, जो लोग निरंतर पोजिशनिंग और प्रामाणिक संवाद के माध्यम से विश्वसनीयता बनाते हैं, वही बाजार का नेतृत्व करते हैं : अखिल प्रेम नाथ।
नई दिल्ली, प्रमोद कौशिक 3 मई : राष्ट्रीय राजधानी स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के बोर्डरूम में शनिवार को आयोजित फाउंडर स्ट्रेटजी सेशन में उभरते उद्यमियों, स्टार्टअप फाउंडर्स, पेशेवरों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक चले इस सत्र में आधुनिक व्यवसायिक परिदृश्य में तेजी से बदलती चुनौतियों और अवसरों पर गंभीर विमर्श किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को ऐसी रणनीतिक समझ प्रदान करना था, जो उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक बाजार में अपनी पहचान स्थापित करने, उत्पादों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने और दीर्घकालिक विश्वास-आधारित संबंध बनाने में सक्षम बना सके। सत्र के दौरान चार प्रमुख आयामों- बिज़नेस एवं पर्सनल ब्रांडिंग स्ट्रेटजी, प्रोडक्ट पोजिशनिंग, बिज़नेस नेटवर्किंग और कम्युनिटी ब्रांडिंग—पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस कार्यक्रम का आयोजन अखिल प्रेम नाथ द्वारा किया गया, जिन्होंने सत्र का संचालन और मॉडरेशन भी किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान कंटेंट- आधारित अर्थव्यवस्था में केवल उत्पाद या सेवा ही नहीं, बल्कि व्यक्ति की विश्वसनीयता और ब्रांड छवि भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि स्पष्ट संवाद, निरंतरता और भरोसेमंद प्रस्तुति ही किसी भी ब्रांड को दीर्घकालिक सफलता दिला सकती है। उनके अनुसार, “आज का उपभोक्ता केवल उत्पाद नहीं, बल्कि उस व्यक्ति या संस्था की विश्वसनीयता भी खरीदता है, जो उसे प्रस्तुत कर रही है।”
कार्यक्रम में स्वामी अमित देव जी महाराज विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने प्रेरक संबोधन में उन्होंने व्यवसाय और स्टार्टअप जगत की वास्तविक चुनौतियों को रेखांकित करते हुए कहा कि अधिकांश समस्याएँ ग्राहक अधिग्रहण और संचालन से जुड़ी होती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि उद्यमी अपने कार्य में ईमानदारी और सिद्धांतों को अपनाते हैं, तो वे हर चुनौती का समाधान खोज सकते हैं। उनके विचारों ने उपस्थित प्रतिभागियों को व्यवसाय के साथ-साथ नैतिक मूल्यों के महत्व को समझने की प्रेरणा दी।
इसके अतिरिक्त, हीरा योगी और योगाचार्य मंगेश ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने व्यवसायिक सफलता में आंतरिक संतुलन, अनुशासन और उद्देश्यपूर्ण जीवन दृष्टि की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि एक सफल उद्यमी के लिए मानसिक स्पष्टता और आत्म-नियंत्रण उतना ही आवश्यक है जितना कि रणनीतिक कौशल।
कार्यक्रम में कई प्रमुख प्रतिभागियों ने सक्रिय योगदान दिया। रोहित कुमार और शशांक (मिस25) से, अधिवक्ता प्रज्ञा मिश्रा, अधिवक्ता निशांत कुरली, जिन्होंने अपने परफ्यूम ब्रांड और एक अभिनव व्यावसायिक विचार की प्रस्तुति दी, सीए अनुपम वही तथा नवल सोमानी सहित अन्य प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए चर्चा को और समृद्ध बनाया। इन प्रस्तुतियों ने न केवल नए विचारों को मंच प्रदान किया, बल्कि व्यावहारिक दृष्टिकोण से व्यापारिक रणनीतियों को समझने का अवसर भी दिया।


