
दीपक शर्मा (जिला संवाददाता )
बरेली : 25 26 जून1975 को आधी रात को तत्कालीन प्रधानमंत्री ने सत्ता पर काबिज रहने की गरज से लोकतंत्र की हत्या कर तानाशाही का राज स्थापित कर दिया था। 19 77 में हुए लोकसभा चुनाव में देश की जनता ने लोकतंत्र की रक्षा करते हुए तानाशाही सरकार का तख्ता पलट दिया था। यह कहना है भारतीय लोकतंत्र रक्षक सेनानी समिति के प्रदेश महामंत्री वीरेंद्र कुमार अटल का। वे शुक्रवार को उपजा प्रेस क्लब में आयोजित गोष्ठी में बोल रहे थे। 25 26 जून आपातकाल को देश भर के लोकतंत्र सेनानी काला दिवस के रूप में मनाते हैं। इस अवसर पर आयोजित गोष्ठी में उन्होंने अपने साथियों से आवाहन किया कि हम सभी को देश की वर्तमान युवा पीढ़ी को आपातकाल में हुए अत्याचारों की कहानी से परिचित कराना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि 1975 में केंद्र सरकार ने लोकतंत्र की हत्या की थी। लोकतंत्र को बचाने की खातिर लाखों लोगों ने इमरजेंसी की यातनाओं को झेला। 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में संघर्षशील लोगों के विशेष प्रयास से कांग्रेस विरोधी सरकार स्थापित हुई थी। इसलिए वर्तमान केंद्र सरकार को आपातकाल के संघर्षशील योद्धाओं को स्वतंत्रता सेनानी के बराबर सुविधा दी जानी चाहिए। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष राजेंद्र बहादुर चौधरी ने प्रदेश सरकार से मांग की कि महंगाई को देखते हुए लोकतंत्र सेनानियों की सम्मान राशि मे दस हजार रुपए की वृद्धि की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की की प्रदेश के मुख्यमंत्री को प्रदेश के सभी लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को लखनऊ में आमंत्रित कर सम्मानित किया जाना चाहिए। इस अवसर पर वेद प्रकाश वर्मा , विनोद कुमार गुप्ता, सुमंत महेश्वरी , राजेंद्र पाल सिंह, शोभा शर्मा , कंचन शर्मा ने भी आपातकाल के दौर की घटनाएं सुनाई।


