
पवन कालरा संवाददाता
बरेली : 25 जून 1975 को देश में लगी इमरजेंसी के 51 वर्ष पूर्ण होने पर हिंदू जागृति मंच ने मंगलवार को लोकतंत्र रक्षक सेनानी परीक्षित मोंगिया के आवास पर कार्यक्रम आयोजित कर लोकतंत्र सेनानियों का अभिनंदन किया। कार्यक्रम में इमरजेंसी लगाने की मानसिकता की कड़ी निंदा करते हुए भारत माता की जय-जयकार की गई।
हिंदू जागृति मंच के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार शर्मा ने कहा कि 25 जून 1975 की आधी रात को भारतीय लोकतंत्र का गला घोंटा गया था। लगभग एक लाख से अधिक देशभक्तों को जेल में डाल दिया गया था। लोकनायक जयप्रकाश नारायण, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी जैसे राष्ट्रीय नेताओं को कड़ी निगरानी में रखा गया। प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई और नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए। 21 महीने तक भारत माता के मस्तक पर यह कलंक का काला टीका लगा रहा।
लोकतंत्र रक्षक सेनानी चौधरी महिपाल सिंह ने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला दिन और दौर बताया। उन्होंने कहा कि जेल की सलाखों के पीछे बिताए दिनों की याद से आज भी रोम-रोम सिहर उठता है।
लोकतंत्र रक्षक सेनानी परीक्षित मोंगिया ने कहा कि आपातकाल के दौरान चलाए गए जबरन नसबंदी अभियान ने लोकतंत्र की सांसें रोक दी थीं। जब 25 जून 1975 को पूरा देश सो रहा था, उस रात दिल्ली में भारतीय लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा था। वरिष्ठ सदस्य सुभाष चंद्र शर्मा ने इमरजेंसी को भारतीय लोकतंत्र के लिए अपराध और पाप के समान बताया। उमेश श्रीमाली ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सहित पूरी कांग्रेस भारत माता को आपातकाल की बेड़ियों में जकड़ने की दोषी है। कार्यक्रम में हिंदू जागृति मंच के सदस्यों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए तन-मन-धन से सत्ता से टकराने वाले लोकतंत्र रक्षक सेनानी चौधरी महिपाल सिंह तथा परीक्षित कुमार मोंगिया को तिरंगा पटका पहनाकर व माल्यार्पण कर नमन किया। बैठक की अध्यक्षता सुभाष चंद्र मोंगिया ने की तथा संचालन उमेश श्रीमाली ने किया।


