
आजमगढ़ (11 जुलाई 2026):
उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व सदस्य, पूर्व अध्यक्ष जिला परिषद, जिला सहकारी बैंक एवं डीसीएफ (अविभाज्य आजमगढ़-मऊ) श्रद्धेय बाबूराम कुंवर सिंह जी की 22वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आज हरिऔध कला केंद्र, आजमगढ़ में एक भव्य एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान उपस्थित जनसैलाब ने उन्हें नम आंखों से अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस वर्ष पुण्यतिथि को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए एक अनूठी पहल की गई। श्रद्धांजलि सभा में आए लोगों को स्मृति स्वरूप पौधे भेंट किए गए और उनसे अपील की गई कि वे बाबूराम कुंवर सिंह जी की स्मृति में अपने घर के आसपास कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और दूसरों को भी इसके लिए जागरूक करें।
उपमुख्य मंत्री व कैबिनेट मंत्रियों को भेंट किए गए विशेष पौधे
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान और परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह को पूर्वांचल विकास आंदोलन के वरिष्ठ नेता व भाजपा नेता प्रवीण सिंह द्वारा पांच अलग-अलग प्रजातियों के विशेष पौधे भेंट किए गए। इसके साथ ही संगठन के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी पौधे देकर पर्यावरण को स्वच्छ और सुंदर बनाने का संदेश दिया गया।
”हमारा वातावरण तभी शुद्ध रह सकता है जब हम प्रकृति का सम्मान करेंगे। बाबूराम कुंवर सिंह जी के नाम पर लगाया गया एक-एक पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा का जरिया बनेगा।” – प्रवीण सिंह, वरिष्ठ नेता (भाजपा)
तमसा परिवार व सफाई कर्मचारी संघ की रही सक्रिय सहभागिता
इस पुनीत कार्य में ‘तमसा परिवार’ के साथियों ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। वहीं, उत्तर प्रदेश पंचायती राज ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों व सदस्यों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। संघ की तरफ से:
- सीपी यादव (जिला अध्यक्ष)
- ओंकारनाथ (जिला महामंत्री)
- गुलाब चौरसिया (वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष)
- अखिलेश कुमार यादव (जिला संगठन मंत्री)
- संजय कुमार सोनकर (जिला उपाध्यक्ष)
- अनिल मौर्य (जिला उपाध्यक्ष)
- रामाश्रय कुमार (सेक्टर प्रभारी)
- बृजेश चौहान
- मिंटू
सहित लगभग 40 से अधिक सफाई कर्मचारियों ने कार्यक्रम में उपस्थित रहकर न केवल व्यवस्था संभाली, बल्कि पौधा वितरण कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। हरिऔध कला केंद्र में आयोजित इस कार्यक्रम ने राजनीति, समाजसेवा और पर्यावरण चेतना का एक अनूठा उदाहरण पेश किया।


