
श्रीलंका से सुभाषिनी रत्नायका होंगी मुख्य वक्ता।
कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में 23 जुलाई 2026 को हिंदी विभाग एक विशेष (अंतरराष्ट्रीय) व्याख्यान का आयोजन करने जा रहा है। इस व्याख्यान का विषय “श्रीलंका में हिंदी का विकास और चुनौतियाँ” रहेगा। कार्यक्रम का आयोजन प्रातः 10 बजे हिंदी विभाग स्थित गणपति चन्द्र गुप्त हॉल में किया जाएगा।
लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि व्याख्यान की मुख्य वक्ता सुभाषिनी रत्नायका होंगी, जो श्रीलंका की केलानिया यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट काउंसलर एवं साइंस फैकल्टी से संबद्ध हैं तथा मोराटुवा यूनिवर्सिटी में हिंदी की विजिटिंग लेक्चरर के रूप में कार्यरत हैं। अपने व्याख्यान में वे श्रीलंका में हिंदी भाषा के इतिहास, विकास, शिक्षण व्यवस्था, सांस्कृतिक प्रभाव तथा वर्तमान समय में हिंदी के समक्ष उपस्थित चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा करेंगी।
प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि कि हिंदी विभागाध्यक्ष कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। हिंदी विभाग समय-समय पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के व्याख्यानों, संगोष्ठियों और शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन करता रहा है, जिससे विद्यार्थियों को वैश्विक दृष्टिकोण प्राप्त होता है तथा हिंदी भाषा और साहित्य के नए आयामों से परिचित होने का अवसर मिलता है। उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों तथा हिंदी प्रेमियों से इस व्याख्यान में अधिकाधिक संख्या में भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाने का आह्वान किया। यह व्याख्यान हिंदी के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप और विश्व पटल पर उसकी बढ़ती स्वीकार्यता को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा।
सुभाषिनी रत्नायका का संक्षिप्त परिचय।
श्रीलंका की प्रतिष्ठित हिंदी विदुषी, शिक्षाविद् एवं छात्र परामर्शदाता डॉ. (सुश्री) सुभाषिनी रत्नायका वर्तमान में यूनिवर्सिटी ऑफ केलानिया के विज्ञान संकाय में छात्र परामर्शदाता के रूप में कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे विभिन्न विश्वविद्यालयों में हिंदी की अतिथि प्राध्यापक, राष्ट्रीय हिंदी-सिंहला/अंग्रेजी दुभाषिया तथा भाषा विशेषज्ञ के रूप में भी सेवाएं दे रही हैं। उन्होंने हिंदी साहित्य में एम.फिल., बौद्ध परामर्श में मास्टर डिग्री प्राप्त की है तथा हिंदी विषय में पीएचडी शोधरत हैं। हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रचार- प्रसार में उनके योगदान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। डॉ. रत्नायका ने हिंदी साहित्य, अनुवाद, शोध एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में अनेक पुस्तकें, शोध-पत्र और लेख प्रकाशित किए हैं तथा विश्व हिंदी सम्मेलन, अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों और शोध सम्मेलनों में सक्रिय भागीदारी निभाई है। उन्हें हिंदी के वैश्विक प्रचार-प्रसार और साहित्यिक योगदान के लिए महात्मा गांधी मेमोरियल अवार्ड, हिंदी सेवी सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।


