
राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय मिश्रा आइडियल पत्रकार संगठन द्वारा मुख्य सचिव को ज्ञापन।
चंडीगढ़, प्रमोद कौशिक 19 मई : देशभर के पत्रकारों के हित में कार्यरत तथा देश के लगभग पच्चीस से तीस राज्यों में विस्तारित आइडियल पत्रकार संगठन की ओर से हाल ही में मुख्यमंत्री कार्यालय के मुख्य सचिव को राज्य के पत्रकारों की विभिन्न समस्याओं और मांगों के संबंध में लिखित ज्ञापन सौंपा गया है।
आइडियल पत्रकार संगठन दिल्ली सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त पत्रकार संगठन है तथा वर्तमान में महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात, सौराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और दक्षिण भारत सहित कई राज्यों में पत्रकारों के हितों के लिए कार्य कर रहा है।
पत्रकारिता एक सामाजिक और रचनात्मक कार्य है। व्यावसायिक पत्रकारिता को छोड़कर अधिकांश पत्रकारों को कोई मानदेय या मासिक वेतन नहीं मिलता। जनहित की आवाज शासन-प्रशासन और सत्ता तक पहुंचाने के लिए पत्रकार कई बार विरोधात्मक और साहसिक निर्णय लेकर लेखन करते हैं, जिसके कारण शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के पत्रकारों को विरोध का सामना करना पड़ता है। कई बार उन पर हमले होते हैं और कुछ पत्रकारों को अपनी जान भी गंवानी पड़ती है। ऐसी कई घटनाएं पहले भी हुई हैं और वर्तमान में भी हो रही हैं।
ऐसी परिस्थितियों में पत्रकारों की लेखनी के बल पर सत्ता और प्रसिद्धि प्राप्त करने वाले कई लोग पत्रकारों के साथ मजबूती से खड़े होने के बजाय स्वयं को बचाने की भूमिका अपनाते हैं, जिससे पत्रकार अकेले पड़ जाते हैं। ऐसे समय में पत्रकारों के हित, सुरक्षा तथा उनकी विभिन्न समस्याओं और मांगों को आवाज देने की जिम्मेदारी आइडियल पत्रकार संगठन (दिल्ली) निभा रहा है।
इसी संदर्भ में संगठन के संस्थापक अध्यक्ष अजयकुमार मिश्रा, राष्ट्रीय संयोजक लक्ष्मण आबा सूर्यवंशी, राष्ट्रीय महासचिव सूर्यकांत कदम, केंद्रीय सहसचिव जमुना चव्हाण, महाराष्ट्र प्रदेश सचिव प्रदीप कांबले सहित विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ पदाधिकारी पत्रकारों की समस्याओं और मांगों को मंजूरी दिलाने के लिए राज्य स्तर पर कार्य कर रहे हैं।
हाल ही में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मुख्य सचिव को दिए गए ज्ञापन में संगठन ने मांग की है कि राज्य में पत्रकारों की बढ़ती असुरक्षा को देखते हुए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (अ) के अंतर्गत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मूल अधिकार को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पत्रकारों को सुरक्षित, सम्मानजनक और संरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
राज्य के अनेक पत्रकार, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के पत्रकार, अपने कर्तव्य का निर्वहन करते समय शारीरिक हमलों, धमकियों, झूठे मामलों में फंसाए जाने और आर्थिक असुरक्षा जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य बीमा और आपातकालीन सहायता की कमी, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन योजना का अभाव तथा सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी जैसी समस्याएं भी मौजूद हैं।
संगठन ने मांग की है कि पत्रकार सुरक्षा कानून तत्काल लागू किया जाए, पत्रकारों पर हमलों को संज्ञेय अपराध घोषित किया जाए, सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा और पत्रकार सम्मान योजना लागू की जाए, पेंशन की पात्रता शर्तों को सरल बनाकर राशि बढ़ाई जाए, दुर्घटना और मृत्यु सहायता निधि बढ़ाई जाए तथा उसका वितरण 30 दिनों के भीतर अनिवार्य किया जाए।
इसके अलावा आवेदन मंजूरी और ऑनलाइन प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया जाए, पत्रकारों के बच्चों के लिए शैक्षणिक छात्रवृत्ति और व्यावसायिक शिक्षा हेतु आर्थिक सहायता निधि दी जाए, ग्रामीण पत्रकारों के लिए विशेष पैकेज लागू किया जाए, जिला स्तर पर शिकायत निवारण और सुरक्षा समन्वय अधिकारी नियुक्त किए जाएं, किफायती आवास योजनाओं में पत्रकारों के लिए आरक्षण दिया जाए तथा पत्रकारों की सभी योजनाओं के लिए ऑनलाइन पोर्टल और हेल्प डेस्क स्थापित किया जाए।
जिला स्तर पर पत्रकार कल्याण समितियों के गठन जैसी महत्वपूर्ण मांगों का ज्ञापन मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपा गया है। साथ ही जानकारी हेतु राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को भी ज्ञापन की प्रतियां भेजी गई हैं। संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने बताया कि इन मांगों की स्वीकृति के लिए जल्द ही मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों से मुलाकात की जाएगी।

