
प्राकृतिक खेती को मिशन बनाने का भी राज्यपाल ने किया आह्वान।
कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 23 अप्रैल : विश्व में आर्य समाज ही एकमात्र ऐसा संगठन है जिसने समाज को जोड़ने और आपसी सौहार्द का वातावरण बनाकर सही दिशा देने का महत्त्वपूर्ण कार्य किया है। महर्षि दयानन्द सरस्वती जी ने आर्य समाज के नियम में मुख्यरूप से कहा कि प्रत्येक को केवल अपनी ही उन्नति में प्रसन्न नहीं होना चाहिए अपितु सबकी उन्नति में अपनी उन्नति समझनी चाहिए। परमार्थ का इससे बड़ा उदाहरण दुनिया में कहीं और नहीं मिल सकता। उक्त शब्द गुरुकुल कुरुक्षेत्र के सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम में आर्यसमाज के गणमान्य लोगां सम्बोधित करते हुए गुजरात के राज्यपाल एवं गुरुकुल के संरक्षक आचार्य देवव्रत ने कहे। इस अवसर पर आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान धर्मवीर आर्य, महामंत्री विजयपाल आर्य, वेद प्रचार अधिष्ठाता स्वामी सच्चिदानन्द, गुरुकुल के प्रधान राजकुमार गर्ग, व्यवस्थापक रामनिवास आर्य, वरिष्ठ भजनोपदेशक रामनिवास आर्य, जयपाल आर्य, जसविन्द्र आर्य आदि भी मौजूद रहे।
आर्यजनों को सम्बोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आर्यसमाज ने हमेशा समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने का सफल प्रयास किया, समस्या का समाधान करना आर्यसमाज का मुख्य कार्य रहा है। भारतीय ऋषि परम्परा में दूसरों के दुःख को अपना समझना और पूरे समाज में आपसी भाईचारे का वातावरण स्थापित करना ही मानवता कहलाता है। प्राकृतिक खेती का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज समाज में नैतिक मूल्य, संस्कारों के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाना भी जरूरी है। रासायनिक खेती ने जहां पर्यावरण, जल और भूमि को नुकसान पहुंचाया है, वहीं हमारे शरीर को बीमारियों का घर बना दिया है जिससे बचने का एकमात्र उपाय है -प्राकृतिक खेती।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती जीवनदायिनी कृषि पद्धति है जिससे आने वाली पीढ़ी को हम न केवल साफ-स्वच्छ वातावरण दे पाएंगे, बल्कि उन्हें पोष्टिक आहार, शुद्ध जल और मित्र जीवों की सौगात भी उपलब्ध होगी। उन्होंने सभी आर्यजनों से आह्वान किया कि जिस प्रकार हवन और सत्संग के माध्यम से युवाओं में संस्कारवान् बनाने का पुनीत कार्य किया जा रहा है, उसी प्रकार किसान बन्धुओं को जनहित में प्राकृतिक खेती मिशन को अपनाना चाहिए जिससे गोमाता का संरक्षण होगा, भूमिगत जल में सुधार होगा और लोगों के स्वास्थ्य में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि आज कैंसर, हार्टअटैक, बीपी, शुगर जैसी बीमारियां आम हो गई है जिसके लिए खेतों में उपयोग होने वाला यूरिया, डीएपी, कीटनाशक दवाइयां है। उन्होंने कहा कि पीएम नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में पूरे देश में लगभग 40 लाख किसान प्राकृतिक खेती से जुड़कर न केवल आर्थिक रूप से सम्पन्न हुए है बल्कि लोगों को पौष्टिक और शुद्ध अन्न भी उपलब्ध करवा रहे हैं। राज्यपाल ने बताया कि उनके आह्वान पर गुजरात में 8 लाख से अधिक किसान आज प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।


