वंदे मातरम की 150 वी वर्षगांठ पर सामूहिक वंदे मातरम् गीत का गायन किया गया,

उत्तराखंड देहरादून
वंदे मातरम की 150 वी वर्षगांठ पर सामूहिक वंदे मातरम् गीत का गायन किया गया,


सागर मलिक
आज दिनांक 7 नवंबर 2025 को बी डी इंटर कॉलेज भगवानपुर,हरिद्वार में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 150 वीं वर्षगांठ पर सामूहिक वंदे मातरम गीत का गायन किया गया।
इस अवसर पर बोलते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य संजय गर्ग ने कहा कि जब हमारा देश गुलाम था तथा हमारे देश पर अंग्रेजों का शासन था,तब अंग्रेजी शासकों ने इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया को खुश करने के लिए सरकारी समारोहों में सरस्वती वंदना के स्थान पर गाड सेव द क्वीन गीत अनिवार्य कर दिया था।सरस्वती वंदना के स्थान पर गाड सेव द क्वीन गीत से डिप्टी कलेक्टर के पद पर तैनात बंकिम चंद्र चटर्जी को बहुत ठेस पहुंची।तब बंकिम चंद्र चटर्जी ने इस गीत के विकल्प के तौर पर वंदे मातरम गीत की रचना की।
150 वर्ष पूर्व आज के ही दिन 1876 को सर्वप्रथम यह गीत बंग दर्शन नामक अखबार में प्रकाशित हुआ। छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य संजय गर्ग ने कहा कि वंदे मातरम गीत स्वतंत्रता की लड़ाई में लोगों के लिए प्रेरणा एवं जोश का उद्घघोष बन गया था। यह दो शब्द अंग्रेजों की अमानवीय नीतियों पर भारी पड़ रहे थे। वंदे मातरम गीत हिंदुओं की आरती,मुसलमानों की अजान तथा सिखों की गुरबाणी बन गए थे। देशवासियों के लिए इन दो शब्दों में शिव के त्रिशूल तथा कृष्ण के सुदर्शन जैसी ताकत थी।यह दो शब्द वंदे और मातरम् अंग्रेजों के विरोध का प्रतीक बन गए थे।अंग्रेज भी इन दो शब्दों से बहुत चिढ़ने लगे थे। देश की आजादी के समय खेत में किसान,सड़क पर नौजवान तथा सरहद पर जवान सबके मुख पर यह दो शब्द वंदे मातरम ही रहते थे। इस अवसर पर प्रधानाचार्य संजय गर्ग ने तिरंगा फहराने तथा वंदे मातरम कहने पर अंग्रेजों की गोली का शिकार होने वाली मातंगिनी हजारा को याद करने के साथ-साथ 1870 में देश के बाहर जर्मनी में वंदे मातरम लिखा हुआ तिरंगा फहराने पर भीकाजी कामा को भी याद किया। आज भी यह गीत देशवासियों में देश के प्रति समर्पित रहने के लिए जोश, जज्बा एवं जुनून पैदा कर देता है।
विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक रजत बहुखंडी ने बताया कि सर्वप्रथम राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को 1896 के कोलकाता अधिवेशन में गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर ने गया था तथा अरविंदो घोष ने इस गीत का अंग्रेजी में और आरिफ मोहम्मद खान ने उर्दू में अनुवाद किया था। कार्यक्रम का सफल एवं सुंदर संचालन कर रही श्रीमती कल्पना सैनी ने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में वंदे मातरम गाने वाली तैयब जी पहले मुस्लिम महिला थी।उन्होंने बताया कि बीबीसी के एक सर्वे के अनुसार वंदे मातरम दुनिया का दूसरा सर्वाधिक लोकप्रिय गीत है।
इस अवसर पर संजय पाल, श्रीमती ललिता देवी,श्रीमती पारुल देवी,श्रीमती अनुदीप, सुधीर सैनी,निखिल अग्रवाल, नेत्रपाल,डा विजय त्यागी,अर्चना पाल,रितु वर्मा, संगीता गुप्ता,तनु सैनी,सहरीन, निधि,सैयद त्यागी, बृजमोहन,अशोक,रोहित, राजकुमार,लोकेश तथा महावीर आदि उपस्थित रहे।

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